चारों ओर ध्रुव की चमक

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 12:25 AM IST

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के हाई सिक्योरिटी जोन में स्थित हेलीकॉप्टर हैंगर इन दिनों आगंतुकों के लिए उत्सुकता का विषय बना हुआ है।
इसकी हवाई पट्टी पर एचएएल में ही निर्मित अत्याधुनिक हल्के हेलीकॉप्टर ‘ध्रुव’ के पांच विमान अपनी छटा बिखेर रहे हैं। अब जबकि देश का सबसे बड़े एयर एक्सपो ‘एयरो इंडिया-2009’ शुरू होने में महज तीन दिन ही शेष रह गए हैं, तब सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
बता दें कि इस मेले की शुरुआत 11 फरवरी से हो रही है और यह 15 फरवरी तक चलेगा। तय समय से पहले ही ध्रुव ने बाजी मार ली है। इसने दुनिया की सबसे बड़ी हेलीकॉप्टर निर्माता कंपनी यूरोकॉप्टर की चुनौती ध्वस्त करते हुए इक्वाडोर को सात हेलीकॉप्टर निर्यात करने का करार हासिल किया है।
ध्रुव ने न केवल काम यानी प्रदर्शन के मामले में बाजी मारी है, बल्कि इसकी कीमत भी महज 70 लाख डॉलर प्रति हेलीकॉप्टर है। इक्वाडोर एयर फोर्स के प्रमुख एयरो इंडिया-2009 में मीडिया के भारी जमावड़े के बीच पांच ध्रुव हेलीकॉप्टर हासिल करेंगे।
वहीं सौदे के बाकी बचे 2 हेलीकॉप्टर छह महीने के भीतर इक्वाडोर को दे दिया जाएंगे। इन हेलीकॉप्टरों की ढुलाई परंपरागत तरीके से करने की बजाय एचएएल ने तय किया है कि इसे विशाल एंटोनोव-124 वाहक विमान से भेजा जाएगा।
एचएएल के रोटरी विंग अनुसंधान और विकास केंद्र के कार्यकारी निदेशक एन. शेषाद्रि ने बताया, ”इन विमानों की ढुलाई के दौरान इनके डैने खोल दिए जाएंगे और इक्वाडोर पहुंचते ही इसे तुरंत दुरुस्त कर दिया जाएगा।” एंटोनोव-124 विमान से इन हेलीकॉप्टरों की ढुलाई पर करीब 3.5 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
इसे एचएएल को देना पड़ेगा, लेकिन कंपनी का मानना है कि इससे बनने वाली साख इस लागत से कहीं अधिक कीमती है। इक्वाडोर के अलावा दूसरे कई दक्षिण अमेरिकी देशा कोलम्बिया और चिली भी ध्रुव का मूल्यांकन कर रहे हैं।
एचएल के मुताबिक, उसे पता है कि कई देश इक्वाडोर के साथ हुए सौदे पर कड़ी निगाह लगाए हैं। इसलिए एचएएल ने इस बात की पूरी व्वयस्था की है कि इक्वाडोर को इन हेलीकॉप्टरों के रखरखाव में कोई विशेष परेशानी न हो।

First Published : February 8, 2009 | 11:21 PM IST