पीरामल एंटरप्राइजेज की इकाई पीरामल कैपिटल ऐंड हाउसिंग फाइनैंस ने सोमवार को कहा कि उसने पांच वर्षीय गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र के जरिए दो चरणों में 4,050 करोड़ रुपये जुटाए हैं। गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र का 2,000 करोड़ रुपये का पहला चरण 10 मार्च को खुला और इसके तहत 12 मार्च को रकम मिल गई। बाकी 2,050 करोड़ रुपये का दूसरा चरण 18 मार्च को खुला और 19 मार्च को रकम मिल गई। कंपनी ने कहा कि केयर रेटिंग्स ने दोनों ही इश्यू को एए की रेटिंग दी है।
इस साल दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) के लिए पीरामल सबसे बड़ी बोलीदाता के तौर पर उभरी और उसका इरादा अधिग्रहण के जरिए उसके खुदरा उधारी कारोबार का विस्तार करने का है।
अन्य एनबीएफसी की तरह पीरामल कैपिटल ऐंड हाउसिंग फाइनैंस ने एनबीएफसी में नकदी के संकट के बाद मुश्किलों को सामना किया, जिसकी शुरुआत इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस) की तरफ से सितंबर 2018 में भुगतान में चूक से हुई।
नकदी के लिए पीरामल ने कई तरीके से फंड जुटाए। अप्रैल 2019 से अब तक कंपनी ने 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा कई इक्विटी लेनदेन से जरिए जुटाए। इसमें कनाडा की फंड सीडीपीक्यू को तरजीही आवंटन से 1,750 करोड़ रुपये, राइट्स इश्यू से 3,650 करोड़ रुपये जुटाए। साथ ही पीरामल की हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म डीआरजी की बिक्री 6,950 करोड़ रुपये मिले।
पीरामल ने श्रीराम ट्रांसपोर्ट की हिस्सेदारी की बिक्री 2,300 करोड़ रुपये में की। साथ ही अपने फार्मा कारोबार का 20 फीसदी हिस्सा कार्लाइल समूह को 3,523 करोड़ रुपये में बेच दिया। यह पीई सौदा भारतीय फार्मा क्षेत्र के सबसे बड़े सौदों में से एक था, जिसमें फार्मा कारोबार की एंटरप्राइज वैल्यू 2.7-3.1 अरब डॉलर हुई।
पीरामल एंटरप्राइजेज के कार्यकारी निदेशक राजेश लड्ढा ने कहा, वित्त वर्ष 2020 की शुरुआत से हमने अपनी देनदारी के प्रोफाइल में काफी बदलाव कर उसे स्थिर, लंबी अवधि वाले फंड का स्रोत बना दिया। कंपनी ने अप्रैल 2019 से अब तक कई लंबी अवधि की उधारी व इक्विटी लेनदेन के जरिए 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए।
इससे उसकी बैलेंस शीट में काफी मजबूती आई। कंपनी का कर्ज-इक्विटी अनुपात एक गुने से कम है। साथ ही आगामी कुछ वर्षों के लिए हमारे दोनों कारोबारों के लिए पर्याप्त रूप से बढ़त वाली पूंजी उपलब्ध है।