‘पैसा नहीं, ब्याज चुकाना है चिंता का असल सबब’

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 1:26 AM IST

मंदी के इस दौर से कोई अनछुआ नहीं रहा है। इसी मंदी की मार एस्सार शिपिंग पोट्र्स ऐंड लॉजिस्टिक्स (ईएसपीएलएल) पर भी पड़ी है।
मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान ईएसपीएलएल के शुद्ध मुनाफे में 74 फीसदी की जबरदस्त गिरावट हुई। इसकी वजह ब्याज मद में खर्च हुई काफी बड़ी राशि रही।
कंपनी के निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी वी. अशोक ने बिजनेस स्टैंडर्ड के कल्पना पाठक से हुई बातचीत में माना कि मौजूदा समय वाकई में काफी मुश्किल है। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश :
आर्थिक मंदी ने कंपनी की पूंजी खर्च योजनाओं पर किस तरह असर डाला है?
हमारी योजना अगले तीन साल में अपने विभिन्न कारोबार में 2.3 अरब डॉलर (10 हजार करोड़ रुपये) के निवेश की है। कुछ कर्ज तो हमने जुटा भी लिए हैं, जबकि जरूरत पड़ने पर और कर्ज लिया जाएगा। कर्ज जुटाना हमारे लिए कभी भी चिंता की बात नहीं रही। चिंता का सबब तो ब्याज है।
ईएसपीएलएल ने 25 जहाजों का ऑर्डर दिया है। इसके लिए जरूरी धन जुटाने में क्या कंपनी को कोई समस्या आ रही है?
ड्राई बल्क (ठोस उत्पादों) और कच्चे तेल की ढुलाई के लिए हमारे पास 25 जहाज हैं। जामनगर (गुजरात) में हम कच्चे तेल के एक टर्मिनल का संचालन कर रहे हैं। हजीरा और सलाया में दो ड्राई पोर्ट खोला जा रहा है।
बंदरगाह और टर्मिनल सेगमेंट में हमें विकास की खासी संभावनाएं दिख रही हैं। कच्चा तेल टर्मिनल की मौजूदा क्षमता एक करोड़ टन को तीन साल में बढ़ाकर 3.4 करोड़ टन कर दिया जाएगा।
घरेलू जहाज उद्योग यूरोपीय बैंक से कर्ज लेते रहे हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वहां से धन मिल पाना मुश्किल ही लग रहा है। क्या कहेंगे आप?
हमारे ज्यादातर कर्ज विशेष शिपिंग बैंक से लिए गए होते हैं, लेकिन हमें अब तक कर्ज हासिल करने में कोई दिक्कत नहीं हुई। हालांकि, वैश्विक आर्थिक संकट के चलते ये बैंक अब धन देने से परहेज कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही से धन का वितरण नए सिरे से शुरू हो जाएगा।
जानकारों के अनुसार, जहाजों से कारोबार 1980 में 40 फीसदी से घटकर अब 12 फीसदी तक आ गई है। आपकी राय…
हमें दुनिया भर से शिकायतें मिल रही हैं कि कंपनियां अपना परिचालन मुनाफा तक नहीं निकाल पा रही हैं। ऐसे में जहाजों को हटाया जा रहा है। यदि किसी जहाज का परिचालन खर्च 6,000 से 7,000 डॉलर प्रतिदिन है, तब तो उससे मुनाफा मिलने की उम्मीद नहीं है।
ऐसे में जहाज को चलाने का कोई मतलब नहीं है। जब बाजार की हालत अच्छी थी जब प्रतिदिन 2 लाख डॉलर तक मुनाफा हो रहा था। अब यह मुनाफा घटकर महज 10 से 15 हजार डॉलर रोजाना रह गया है। इससे केवल परिचालन खर्च निकल पाता है।

First Published : February 17, 2009 | 10:59 PM IST