बीना रिफाइनरी से निकलेगा ओमान

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 4:12 AM IST

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के विनिवेश की तैयारी के बीच मध्य प्रदेश में उसके संयुक्त उद्यम भारत ओमान रिफाइनरी से विदेशी साझेदार नैशनल पेट्रोलियम इन्वेस्टमेंट कंपनी ऑफ ओमान ओक्यू निकल सकती है और अपनी हिस्सेदारी बीपीसीएल को दे सकती है।
ओक्यू को पहले ओमान ऑयल कंपनी के नाम से जाना जाता था। भारत ओमान रिइाफाइनरी इस साल मार्च में बीपीसीएल की सहायक बनी, इससे पहले यह बीपीसीएल व ओमान के बीच 50-50 फीसदी हिस्सेदारी वाला संयुक्त उद्यम था। सूत्रों ने कहा कि अगर ओमान इच्छुक है और तय शर्तों पर यह सौदा हो जाता है तो विनिवेश प्रक्रिया से पहले यह लेनदेन हो सकता है क्योंंकि इस बात की आशंका है कि विनिवेश में देर हो सकती है।
एक सूत्र ने कहा, यह अभी शुरुआती चरण में है। अभी तक ओमान की तरफ से कोई लिखित संदेश नहीं मिला है। हालांकि बीपीसीएल की तरफ से इस कंपनी के विलय का मतलब बनता है। ओक्यू ने बिजनेस स्टैंडर्ड की पूछताछ का जवाब नहीं दिया। सूत्रों ने संकेत दिया कि ओमान किसी विदेशी कंपनी या भारत की निजी कंपनी की अल्पांश साझेदार बनने की इच्छुक नहीं है।
7 मार्च को बीपीसीएल के संभावित निवेशकों को साझा किए गए प्रारंभिक सूचना के मुताबिक, बीपीसीएल ने 1,000 करोड़ रुपये के अनिवार्य परिवर्तनीय ऋणपत्रों और 1,585.68 करोड़ रुपये के शेयर वॉरंट में निवेश नहीं किया था, जिसके परिवर्तित होते ही भारत ओमान रिफाइनरी बीपीसीएल की सहायक बन जाती। एक पखवाड़े के भीतर इन वॉरंटों को शेयर पूंजी में परिवर्तित किया गया और भारत ओमान रिफाइनरी बीपीसीएल की सहायक बन गई। उसके बाद भारत ओमान रिफाइनरी में बीपीसीएल की शेयरधारिता 50 फीसदी से बढ़कर 63.38 फीसदी हो गई। 31 मार्च 2019 को भारत ओमान रिफाइनरी की अधिकृत पूंजी 7,000 करोड़ रुपये थी जबकि चुकता पूंजी 1,777.23 करोड़ रुपये और बीपीसीएल व ओमान ऑयल कंपनी समान हिस्सेदारी वाले साझेदार थे।
एक अन्य सूत्र ने कहा, यह कूटनीतिक मामला है। इसे लेकर काफी संवेदनशीलता है। इस समय यह भारत और ओमान के सरकारों के बीच कूटनीतिक पहल है। इसलिए इसे ठीक तरह से संभाला जाएगा। हम बीपीसीएल के लिहाज से भारत ओमान रिफाइनरी को और आकर्षक बनाने के लिए कई संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में कोचीन जैसी संभावना हो सकती है, लेकिन अभी कहना जल्दबाजी होगी। कोचीन रिफाइनरी सरकार और अमेरिका की फिलिप्स पेट्रोलियम कॉरपोरेशन का संयुक्त उद्यम था। कोचीन में सरकार ने 55 फीसदी हिस्सेदारी बीपीसीएल को 800 करोड़ रुपये में बेच दी और बाद में उसका कंपनी के साथ विलय कर दिया गया क्योंकि उसने फिलिप्स पेट्रोलियम की भी हिस्सेदारी ले ली।
दूसरी ओर, भारत ओमान रिफाइनरी के स्टेटस को लेकर चिंता है कि  इसे मौजूदा वित्त वर्ष में सार्वजनिक कंपनी माना जाएगा या फिर उसे मौजूदा प्रारूप में ही बेचा जाएगा क्योंकि हिस्सेदारी बढ़ाए जाने से पहले दस्तावेज जारी किए गए थे। भारत ओमान रिफाइनरी के कर्मचारियों को बीपीसीएल या अन्य पीएसयू कर्मचारी की तरह फायदा मिलना अभी बाकी है।

First Published : July 28, 2020 | 12:09 AM IST