उड़ीसा की आईटी इकाइयां बंदी के कगार पर

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 09, 2022 | 4:53 PM IST

उड़ीसा में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) इकाइयां मुश्किलों का सामना कर रही हैं। राज्य में ज्यादातर इकाइयां वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से बंद होने के कगार पर हैं।


उड़ीसा में लघु एवं मझोली आईटी कंपनियों का मंच ‘कन्फेडरेशन ऑफ इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी एंटरप्राइजेज’ (सीआईटीई) छोटे उद्योगों के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए एक रणनीति बनाए जाने पर जोर दे रहा है। राज्य में 139 पंजीकृत आईटी कंपनियों में से तकरीबन 98 फीसदी लघु एवं मझोले उद्योगों (आईटीएसएमई) से जुड़ी हैं।

उड़ीसा सरकार अधिक सक्रिय आईटी नीतियों को अपना कर मौजूदा स्थिति से निपटने की कोशिश कर रही है। आईटीएसएमई के लिए नई राज्य सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) नीति को घोषित किया जाना और प्रस्तावित फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) पर भुवनेश्वर विकास प्राधिकरण के प्लान की स्वीकृति के साथ इसे अपनाया जाना अभी बाकी है।

सीआईटीई के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, ‘हम अपने सदस्यों को मंदी की आंच से दूर रखने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वैश्विक मंदी के इस भयावह हमले ने हमें गहराई से चोट पहुंचाई है।

फिलहाल हमें बंदी के भय के बीच उस वक्त तक कामकाज बरकरार रखना मुश्किल होगा जब तक सरकार कोई सक्रिय नीति नहीं अपना लेती।’

उड़ीसा में बड़ी तादाद में बीपीओ कंपनियों को अपना अस्तित्व बचाए रखने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि बैंकिंग, फाइनैंशियल सर्विसेज ऐंड इंश्योरेंस (बीएफएसआई) क्षेत्र से ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में आईटी क्षेत्र के प्रति सरकारी उदासीनता की वजह से आईटीएसएमई में कंपनियो की दिलचस्पी कम हो गई है।

उड़ीसा के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री एस. एन. पात्रो कहते हैं, ‘मुझे वैश्विक मंदी की वजह से इन उद्योगों की हुई दुर्दशा के बारे में आईटीएसएमई से कोई निश्चित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि मैं इस बात से अवगत हूं कि कुछ लघु इकाइयों को जरूरत के मुताबिक ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। राज्य सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए आश्वस्त है।’

सरकार ने आवंटित भूमि का इस्तेमाल नहीं किए जाने के लिए 35 आईटीएसएमई को कारण बताओ नोटिस भेजा है। राज्य ने अगले कुछ महीनों में भुवनेश्वर के टेम्पल सिटी के पास 3 इन्फोसिटी की स्थापना के लिए 1,074 एकड़ भूमि आवंटित की है।

11वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक इन्फोसिटी से एक अरब डॉलर के सॉफ्टवेयर निर्यात का लक्ष्य रखा गया है। जहां इन्फोसिटी 1 पहले से ही इन्फोसिस, टीसीएस और सत्यम जैसी कंपनियों का ठिकाना बन चुकी है वहीं इन्फोसिटी 2 और इन्फोसिटी 3 में आईबीएम और विप्रो को जगह मुहैया कराए जाने की संभावना है।

राज्य में 5 आईटीएसईजेड स्थापित किए जाने की योजना है। बिल्डिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और भूमि की मांग के अलावा आईटीएसएमई सरकार से उद्यम कोष के निर्माण की भी मांग कर रहे हैं।

ये उद्योग अपनी आईटी परियोजनाओं के लिए आवंटित भूमि के लिए किराये में 10 फीसदी की छूट की भी मांग कर रहे हैं। सस्ते किराए पर भूमि उपलब्ध कराए जाने के अलावा यह क्षेत्र सरकार से अधिक एफएआर की भी मांग कर रहा है।

यह क्षेत्र चाहता है कि सरकार  एफएआर को 0.75 फीसदी से बढ़ा कर 2.5 फीसदी करे और इन्फोसिटी के आसपास सड़क, स्ट्रीट लाइट, होटल, शॉपिंग मॉल, परिवहन और सुरक्षा जैसी सुविधाओं को विकसित किया जाए।

First Published : January 5, 2009 | 8:59 PM IST