प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा दोनों की पहली मुलाकात लंदन में जी-20 की बैठक के दौरान होगी।
आगामी 1-2 अप्रैल को लंदन में हो रहे इस सम्मेलन के बारे में जानकारों का मानना है कि आर्थिक मंदी पर चर्चा होगी। मनमोहन दुनिया के उन गिने-चुने राष्ट्राध्यक्षों में शामिल होंगे जिनसे ओबामा अलग से मिलेंगे।
विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने बताया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसी बड़ी संस्थाओं में सुधार और उसके नियमन का मुद्दा उठाएगा। भारत इन संस्थाओं के क्रियाकलाप को अधिक से अधिक पारदर्शी बनाए जाने की मांग करेगा।
पिछले नवंबर में वाशिंगटन में हुए जी-20 सम्मेलन की तरह भारत यहां भी अमेरिका के संरक्षणवादी कदम का विरोध करेगा। गौरतलब है कि अमेरिका ने उन कंपनियों को कई अरब डॉलर के राहत पैकेज के साथ कई तरह की करों में छूट दी जो अमेरिकी नागरिकों को नौकरियों पर रखने को तवज्जो देते हैं।
आउटसोर्सिंग को हतोत्साहित करने की अमेरिकी नीति पर भी भारत अमेरिका को ध्यान दिलाएगा। इस बातचीत में नि:शस्त्रीकरण और अफगानिस्तान-पाकिस्तान पर नई अमेरिकी नीति के भी छाए रहने की संभावना है। मनमोहन और ओबामा की मुलाकात सम्मेलन से इतर होनी तय हुई है। कूटनीतिक हलकों में इस बैठक को काफी तवज्जो दी जा रही है।