अब चेन्नई में भी जल्दी ही मेट्रो रेल दौड़ेगी। कैबिनेट की आर्थिक मामलों की कमेटी ने इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। 14,600 करोड़ रुपये वाली इस परियोजना के 2014-15 तक पूरी होने की उम्मीद है।
इसके सरकार ने एक विशेष कंपनी चेन्नई मेट्रो रेल लि. बनाई है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार की बराबरी की हिस्सेदारी होगी। इस परियोजना को पूरा करने में 14,600 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसमें मूल्य वृध्दि, केंद्रीय कर और ब्याज शामिल है।
हालांकि, इसमें राज्य सरकार के करों और जमीन की कीमत को शामिल नहीं किया गया है। इस लागत का 59 फीसदी हिस्सा जापान सरकार से मिले ऑफिशियल डेवलपमेंट अस्सिटेंस (ओडीए) कर्ज से पूरा किया जाएगा।
इस बाबत जापान और भारत के बीच पिछले साल 21 नवंबर को समझौते पर दस्खत पर हस्ताक्षर किए गए थे। कुल लागत का 15 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार परियोजना लागत के तहत देगी, जबकि पांच फीसदी हिस्सा कर्ज के रूप राज्य सरकार को देगी।
बाकी की 21 फीसदी लागत राज्य सरकार को उठानी पड़ेगी। आधिकारिक बयान के मुताबिक वित्त जुटाने के मामले में यह मुल्क की सबसे तेज मेट्रो रेल परियोजना है। इसके लिए साल भर में ही जापान सरकार से कर्ज ले लिया गया और भारत सरकार ने भी पैसे देने पर अपनी सहमति जता दी।
दूसरी मेट्रो रेल परियोजनाओं में इस काम में कम से कम ढाई साल का वक्त लग गया था। इस परियोजना के तहत पहले चरण में 45 किलोमीटर की लंबाई वाले दो कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा।
इसमें से 24 किलोमीटर जमीन के अंदर मेट्रो रेल दौड़ेगी, जबकि बाकी के 21 किमी में मेट्रो रेल ट्रैक जमीन के ऊपर बनाए जाएंगे। सड़क यातायात की तुलना में मेट्रो रेल सिर्फ 20 फीसदी ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं।
मेट्रो रेल का एक कोच व्यस्ततम समय में सड़क पर से 16 बसों या 300 कारों या फिर 600 दोपहिया वाहनों को हटाने के काबिल होता है।