अब सभी को करानी होगी कॉस्ट ऑडिटिंग

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 9:10 PM IST

कंपनी मामलों के मंत्रालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें यदि सरकार ने मान लीं तो 50 करोड़ रुपये से अधिक की चुकता पूंजी वाली कंपनियों को वैधानिक कास्ट ऑडिटिंग कराना अनिवार्य हो जाएगा।
यह प्रावधान लागू हो जाने पर 20 से 25 हजार कंपनियां लागत ऑडिट के दायरे में आ जाएंगी। विशेषज्ञ समिति ने अपनी सिफारिशें मंत्रालय को सौंप दी है। कंपनी मंत्रालय सुझाव के लिए इन सिफारिशों को जल्द ही अपनी वेबसाइट पर लगाएगा।
फिलहाल केवल 40 उद्योग और कुछ विशेष उत्पाद ही कास्ट ऑडिट के दायरे में आते हैं। अभी तकरीबन 6,000 संस्थाएं इस दायरे में आती हैं। लेकिन केवल 2,200 कंपनियों ने ही अपनी कास्ट ऑडिट करवाए हैं। जानकारों के मुताबिक, प्रावधान में बदलाव होने से कॉस्ट अकाउंटिंग के पेशे को काफी फायदा मिलेगा।
अब सभी कंपनियों को अपने यहां अनिवार्य तौर पर कॉस्ट ऑडिटर की नियुक्ति करनी होगी। देश में अभी महज 1,700 अकाउंटिंग प्रोफेशनल्स ही कार्यरत हैं, जबकि 42,000 लोगों ने इसकी डिग्री हासिल की हुई है।
देश में कॉस्ट अकाउंटिंग की नियामक संस्था इंस्टीटयूट ऑफ कॉस्ट ऐंड वर्क्स अकाउंट्स ऑफ इंडिया (आईसीडब्ल्यूएआई) के अध्यक्ष कुणाल बनर्जी ने बताया, ”हम आशा करते हैं कि इस संबंध में की गई सिफारिशें मान ली जाएं। इस संस्था में तकरीबन सभी उद्योगों का प्रतिनिधित्व है, लिहाजा हमें नहीं लगता कि इसका कोई विरोध होगा।” आईसीडब्ल्यूएआई पहले से ही देश में कॉस्ट ऑडिटिंग का दायरा बढ़ाने की मांग करता रहा है।

First Published : March 23, 2009 | 6:42 PM IST