नकदी नहीं, तो खरीद कैसी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 08, 2022 | 11:07 AM IST

बाजार की हालत तो इस समय खराब ही नजर आ रही है। दरअसल मंदी ने बैंकों को जो मार लगाई है, उसका असर लक्जरी वस्तुएं मसलन कंज्यूमर डयूरेबल्स पर ज्यादा पड़ रहा है।


फाइनैंस मुश्किल है, महंगे उत्पाद खरीदे नहीं जा रहे हैं। यह दिक्कत अगले साल भी बरकरार रहेगी। इसे भूल जाएं, तब भी आम उपभोक्ता के बीच निराशा का माहौल पसरा है। खास तौर पर नौकरीपेशा लोगों के सामने छंटनी की तलवार लटकी है।

कंज्यूमर डयूरेबल्स कंपनियों को सबसे ज्यादा ग्राहक आईटी, बीपीओ और वित्तीय सेवा क्षेत्रों से ही मिलते थे, लेकिन अब उनकी नौकरी ही नहीं बच रही। ऐसे में खरीदारी कौन करेगा। मेरे खयाल से अनिश्चितता का यह माहौल तब तक बरकरार रहेगा, जब तक कंपनियां रणनीति नहीं बदलेंगी।

कंपनियां लागत कम करने के तमाम उपाय आजमा लेंगी, तो कंज्यूमर डयूरेबल्स बाजार भी सुधरेगा। छंटनी का डर खत्म हो जाएगा, तो लोग पैसे बचाने के बचाय खर्च करना शुरू कर देंगे। लेकिन कम से कम पहली छमाही में तो इसके आसार न के बराबर हैं।

एक और खास बात यह होगी कि कंपनियां कीमत पर ध्यान देंगी। एलजी जैसी कंपनियां महंगे उत्पादों के जरिये एक खास वर्ग के पास जा रही हैं, लेकिन अब उन्हें खुद को बदलना पड़ सकता है। सस्ते उत्पाद बनेंगे और लागत कम करने के लिए छंटनी जैसे उपाय भी किए जाएंगे।

इसके अलावा वेतन में मामूली इजाफे की ही उम्मीद लगानी चाहिए, वह भी योग्य कर्मचारियों को मिलेगा।हां, यह बात बिल्कुल तय है कि ये कंपनियां पहले की तरह भारी भरकम कारोबारी वृद्धि नहीं कर सकेंगी। बाजार में इजाफा होगा भी, तो कम से कम रफ्तार के साथ।

मंदी में एक ही अच्छी खबर है कि फसल शानदार हुई है। इससे गांवों में खरीदारों के पास पैसा आएगा और उसका कुछ हिस्सा इन कंपनियों के हिस्से भी आ जाएगा। जाहिर है कि छोटे शहरों और गांवों में बाजार तलाशने से 2009 में इनके लिए परेशानी कम हो सकती हैं।

(बातचीत :  ऋषभ कृष्ण)

मंदी तो है, लेकिन नए उत्पादों के जरिये बिक्री बढ़ाने की कोशिश होगी

मून बी शिन
प्रबंध निदेशक, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स


छोटे शहरों के बाजार बढ़ेंगे, जिससे बिक्री में भी होगा इजाफा

रवींद्र जुत्शी
उप प्रबंध निदेशक सैमसंग इंडिया

First Published : December 25, 2008 | 11:27 PM IST