प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
राष्ट्रीय कंपनी कानून अपील न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने वीडियोकॉन समूह की दो कंपनियों – वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड और वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स लिमिटेड की दिवाला समाधान प्रक्रिया अलग-अलग चलाने के फैसले को बरकरार रखा है। इसके साथ ही एनसीएलएटी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें दोनों मामलों को एक साथ जोड़ने का निर्देश दिया गया था।
एनसीएलएटी ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि दोनों कंपनियों के ऋणदाताओं का मानना है कि कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) स्वतंत्र रूप से संचालित की जाए, क्योंकि दोनों कंपनियों के कारोबार की प्रकृति अलग है और उनके पुनरुद्धार के लिए अलग-अलग विशेषज्ञता की आवश्यकता है।
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना और अजय दास मेहरोत्रा के पीठ ने कहा कि वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में कार्यरत है, जबकि वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स तेल एवं गैस कारोबार से जुड़ी कंपनी है। ऐसे में किसी एक इकाई के लिए दोनों प्रकार के कारोबार को प्रभावी ढंग से खड़ा करना व्यावहारिक नहीं होगा।
पीठ ने अपने 14 मई, 2026 को पारित 40 पृष्ठ के आदेश में कहा, ‘एक ही इकाई के पास इतने विविध प्रकार के कारोबार को फिर खड़ा करने की विशेषज्ञता नहीं हो सकती।’
न्यायाधिकरण ने कहा कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का उद्देश्य केवल ऋणदाताओं के बकाये का समाधान करना नहीं, बल्कि संबंधित कंपनी को चालू स्थिति में बनाए रखना भी है। इसलिए कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने अपने व्यावसायिक विवेक का उपयोग करते हुए दोनों कंपनियों के लिए अलग-अलग सीआईआरपी चलाने का निर्णय लिया था और इस निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। आदेश में कहा गया कि अलग-अलग प्रक्रिया से ऐसे खरीदारों को मौका मिलेगा जिनके पास संबंधित कारोबार का अनुभव और विशेषज्ञता हो तथा वे परिसंपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करते हुए कारोबार को फिर खड़ा कर सकेंगे।