मंदी में भी मोजर बेयर पीवी करेगी विस्तार

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 6:36 PM IST

आर्थिक मंदी के बावजूद सौर विद्युत उत्पादन करने वाली मोजर बेयर फोटोवोल्टिक (एमबीपीवी) की निगाहें विस्तार पर टिकी हैं।
कंपनी के मुताबिक, इस साल वह अमेरिकी बाजार में उतरने के साथ ही यूरोप में अपने कारोबार का विस्तार करेगी।
एमबीपीवी के लिए यूरोप की बड़ी अहमियत है। यहां इसकी तीन तकनीकों क्रिस्टलाइन (ठंडे वातावरण के लिए उपयोगी), पतली फिल्म (गर्म वातावरण के लिए उपयुक्त) और कंसंट्रेटर (सूर्य की सीधी किरणों से बचाव के लिए) का बाजार 1,800 से 2,100 करोड़ रुपये का है।
उल्लेखनीय है कि मोजर बेयर की कुल आय में एमबीपीवी की हिस्सेदारी 10 से 15 फीसदी की है। फिलहाल फोटोवोल्टिक उद्योग 30 फीसदी की सालाना दर से तरक्की कर रहा है।
एमबीपीवी के सीईओ राजीव आर्य के मुताबिक, ”हमारी योजना यूरोप में जर्मनी, फ्रांस, बुल्गारिया और चेकोस्लोवाकिया में कारोबार को फैलाने की है। इसके अलावा, अमेरिका में भी कारोबार शुरू करने की योजना बना ली गई है।”
कंपनी के मुताबिक, जर्मनी, अमेरिका और जापान पीवी कारोबार के सबसे संभावनाशील बाजार हैं। आर्य ने बताया कि हालांकि जापान में काम करना उनके लिए बहुत मुश्किल है। वहीं 200 मेगावाट की क्षमता के साथ भारत का बाजार अब तक काफी छोटा है।
उसकी योजना 2010 तक क्रिस्टलाइन सिलिकॉन तकनीक को मौजूदा 80 मेगावाट से बढ़ाकर 300 मेगावाट करने की है। पतली फिल्म की क्षमता 40 मेगावाट से बढ़ाकर 600 मेगावाट और कंसनट्रंटेर तकनीक की 5 से बढ़ाकर 100 मेगावाट करने की है।
आर्य ने बताया कि 2010 कैलेंडर वर्ष के अंत तक कंपनी का लक्ष्य कारोबार को 1 अरब डॉलर और उत्पादन 1 गीगावाट से ऊपर ले जाने का है। फिलहाल एमबीपीवी की उत्पादन क्षमता 120 मेगावाट की है। 2009 के अंत तक इसे 300 मेगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य कंपनी ने रखा है।
कंपनी का दावा है कि इन परियोजनाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी। उसने बताया कि कर्ज और पूंजी के 2:1 का अनुपात रखते हुए वह धन की उगाही करेगी। इस जुटाए गए धन का इस्तेमाल वह विस्तार में करेगी। मोजर बेयर समूह के मुख्य वित्त अधिकारी योगेश माथुर के मुताबिक, विस्तार परियोजनाओं के मूर्त रूप अख्तियार कर लेने से विभिन्न तकनीकों की हिस्सेदारी ही बदल जाएगी।
उन्होंने बताया, ”कुल ऊर्जा उत्पादन में क्रिस्टलाइन तकनीक की मौजूदा 90 फीसदी की भागीदारी घटकर 70 फीसदी रह जाएगी। पतली फिल्म की हिस्सेदारी 3-4 फीसदी से बढ़कर 20 फीसदी हो जाएगी। कंसनट्रेटर का मौजूदा योगदान 6-7 फीसदी से बढ़कर 10 फीसदी हो जाएगा।” इस विस्तार के चलते एमबीपीवी के कर्मचारियों की संख्या 2009 तक मौजूदा 600 से बढ़कर 1,200 हो जाएगी।

First Published : March 2, 2009 | 2:33 PM IST