मित्सुबिशी बोली तौबा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 10:04 PM IST

नैनो तो आ गई, लेकिन तमाम दूसरी छोटी कारों के लिए आपको इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि कंपनियां फिलहाल मंदी के दौर में उन्हें उतारने से कतरा रही हैं।
जापानी कार कंपनी मित्सुबिशी मोटर कॉर्पोरेशन ने भी भारतीय कंपनी हिंदुस्तान मोटर्स के साथ साझे उपक्रम में छोटी कार लाने का अपना इरादा ठंडे बस्ते में डाल दिया है। कंपनी के मुताबिक पूंजी की किल्लत और भारतीय बाजार में कारों की कम होती मांग ही इसकी असल वजह हैं।
अभी तक प्रीमियम श्रेणी की कार बनाने के तौर पर ही पहचानी जाने वाली मित्सुबिशी की योजना 2011-12 तक छोटी कार देसी बाजार में पेश करने की योजना थी। इसको वैश्विक कार के तौर पर भी प्रचारित किया जा रहा था। कंपनी ने इसके लिए दो योजनाएं बनाई थीं।
पहली तो यह कि अपनी ही किसी छोटी कार का दोबार डिजाइन कर उसे देसी बाजार में उतारा जाए और दूसरी योजना यह थी कि एक नई कार का डिजाइन किया जाए और भारत में बडे पैमाने पर बनाकर उसे दुनिया के दूसरे बाजारों में भी बेचा जाए। लेकिन पूंजी की कमी ने कंपनी को इस योजना को मुल्तवी करने पर मजबूर कर दिया है।
मित्सुबिशी ने अगले साल की अपनी निवेश योजनाओं का खाका दोबारा खींचा है। छोटी कार परियोजना के टलने पर संयुक्त उपक्रम में जापानी कंपनी की भारतीय साझेदार हिंदुस्तान मोटर्स के प्रबंध निदेशक रवि संथानम कहते हैं, ‘फिलहाल ऑटामोबाइल बाजार बहुत अनिश्चित हो गया है और कुछ भी अंदाजा लगाना आसान नहीं है। इस वजह से हमें अगले वित्त वर्ष में अपने पूंजीगत खर्च को दोबारा तय करना पड़ा है।’
हालांकि उन्होंने इसका ब्यौरा देने से इनकार कर दिया। लेकिन कंपनी की योजना में चेन्नई संयंत्र की क्षमता बढ़ना जरूर शामिल है। फिलहाल यहां पर साल भर में 12,000 कारें बनाई जाती हैं। कंपनी इस आंकड़े को बढ़ाकर 1,00,000 तक करना चाहती है। मित्सुबिशी अभी एसयूवी-आउटलैंडर, मोटेरो और पजेरो तथा सेडान लांसर तथा लांसर सेडिया भारत में बेचती है।
छोटी कार गैराज में
हिंदुस्तान मोटर्स के साथ बननी थी कार
लेकिन पूंजी की कमी और मांग आई आड़े

First Published : March 30, 2009 | 8:00 PM IST