एक ओर जहां बड़ी औद्योगिक इकाइयों की उधारी में 1.5 फीसदी की ऋणात्मक वृद्घि दर्ज की गई है वहीं मध्यम आकार की कंपनियों ने अपने ऋण में भारी भरकम इजाफा किया है। फरवरी 2021 में मध्यम आकार वाली कंपनियों के ऋण में सालाना आधार पर 21 फीसदी की वृद्घि हुई है। इसी तरह से जनवरी 2021 में बड़ी कंपनियों को दिए जाने वाले ऋण में 2.5 की ऋणात्मक वृद्घि दर्ज की गई थी जबकि मध्यम आकार की कंपनियों के ऋण में 19.1 फीसदी की वृद्घि नजर आई थी।
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक सूक्ष्म और लघु उद्यमों के ऋणों में भी फरवरी महीने में 1.5 फीसदी की वृद्घि हुई जबकि जनवरी 2021 में यह 0.9 फीसदी रही थी।
बैंकरों का कहना है कि ऋण में इजाफा आर्थिक सुधार, नियामकीय समर्थन, आपतकालीन ऋण और तरलता सहयोग के लिए सरकारी गारंटी जैसे विभिन्न कारणों से हुआ है।
बड़ी कंपनियों के बकाया कर्ज में लगातार गिरावट आ रही है क्योंकि उनमें से तमाम ने मौजूदा कर्ज का पुनर्भुगतान किया है और कम ब्याज दरों का लाभ लिया है और नकदी का निपटान किया है। बैंकरों का कहना है कि कार्यशील पूंजी की मांग जहां लगातार बढ़ रही है, वहीं पूंजीगत व्यय के मामले में गतिविधियां बहुत कम हैं।