फर्जीवाड़े में फंसी सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज के संस्थापक बी. रामालिंग राजू के बेटों द्वारा प्रवर्तित कंपनी मायटास इन्फ्रा लिमिटेड के नवगठित बोर्ड ने कंपनी के प्रमुख वित्तीय अधिकारी को 2009-10 की वित्तीय योजना की रिपोर्ट 7 से 10 दिनों के भीतर सौंपने को कहा है।
सरकार द्वारा गठित मायटास इन्फ्रा की नई बोर्ड के एक सदस्य और आईसीएआई के पूर्व अध्यक्ष वेद जैन ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हमलोगों ने कंपनी को कर्ज देने वाली संस्थाओं और प्रमोटरों से बात की है और सीएफओ को कहा है कि वे बैंकरों के सहयोग से मौजूदा वित्तीय वर्ष की योजना तैयार करें।’
मायटास की नवगठित बोर्ड की बैठक वेद जैन की अध्यक्षता में यहां गुरुवार को हुई। इसमें कंपनी की निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं और बीओटी (निर्माण, परिचालन और हस्तांतरण) कारोबार और कॉर्पोरेट पुनर्संरचना (सीडीआर) के संबंध में कंपनी के प्रस्तावों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि कंपनी के पास अभी 800 करोड़ रुपये के ऑर्डर हाथ में है।
मायटास इन्फ्रा के उपाध्यक्ष बी. तेजा राजू ने कहा है कि बोर्ड ने कंपनी के स्वतंत्र निदेशक आर. पी. राजू का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। कर संबंधी वकील और सरकार द्वारा गठित मायटास बोर्ड के एक दूसरे सदस्य ओ. पी. वैश्य ने कहा, ‘सीडीआर की प्रक्रिया जारी है, लेकिन यह काफी जटिल है। लेकिन किसी तरह हमलोग इसमें प्रगति पर काम कर रहे हैं।’
वैश्य ने कहा कि इस बाबत कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी। वैश्य के मुताबिक कंपनी में तरलता का निर्माण करना काफी मुश्किल है और इसी पर अभी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘तरलता बनाने की प्रक्रिया जारी है। यह मुश्किल काम है, इसलिए इसमें थोड़ा वक्त लगेगा।’
वैश्य ने कहा कि कंपनी लॉ बोर्ड के आदेश के मुताबिक हम उम्मीद करते हैं कि अगले कुछ दिनों में सरकार नवगठित बोर्ड में दो और लोगों की नियुक्ति करेगी। जैसे ही इन दो सदस्यों की नियुक्ति होती है, उसके तुरंत बाद बोर्ड की एक बैठक और बुलाई जाएगी।
मायटास से जुडी और ढेर सारे मसले पर बोर्ड बार बार बैठक करेगी। उन्होंने कहा, ‘हमारी कोशिश रहेगी कि कंपनी के प्रबंधन को लेकर जो एक खाई पैदा हो गई है, उसे भरा जाए।’ जैन ने कहा, ‘हमारी तात्कालिक प्राथमिकता 2009-10 की व्यापारिक योजना है।’
मालूम हो कि कंपनी ने 12,132 करोड़ रुपये की हैदराबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट हासिल की थी, लेकिन इस परियोजना की वित्तीय उद्धोषणा 17 मार्च को ही हो गई। इस तरह कंपनी के हाथ से यह परियोजना निकल गई। इस बाबत कंपनी ने हैदराबाद मेट्रो रेल लिमिटेड से इसकी तारीख बढ़ाने की आग्रह की थी। हैदराबाद मेट्रो रेल लिमिटेड के अध्यक्ष सीवीएसके शर्मा ने कहा कि सरकार मायटास इन्फ्रा के आग्रह पर गौर कर रही है।
पकड़ा जाएगा राजू का झूठ!
सीबीआई ने कहा कि वह सत्यम कंप्यूटर के संस्थापक रामलिंग राजू की लाई-डिटेक्टर जांच कराएगी। एजेंसी का मानना है कि राजू ने कंपनी के घोटोले के संबंध में सारी बातें नहीं बताई हैं।
सीबीआई के निदेशक अश्विनी कुमार ने कहा कि सत्यम का घोटाला बाकी मामलों से अलग है, क्योंकि घोटाला करने का आरोपी संस्थापक है, न कि कोई बाहरी आदमी। घोटाला किसी बाहरी आदमी ने नहीं किया, बल्कि उस आदमी ने किया, जिसने इसे कबूल किया है।