कैप्टन गोपीनाथ की नई कोशिश में पैसा लगाने को लेकर कंपनियों के बीच अच्छी-खासी होड़ मच चुकी है।
दरअसल, गोपीनाथ की जल्द ही शुरू होने वाली कंपनी डेक्कन कार्गो में अनिल अंबानी और अजीम प्रेमजी पहले से ही पैसा लगाने का इरादा जाहिर कर चुके हैं।
अब तो आईबीएम कैपिटल और सिंगापुर कार्गो भी इस कोशिश में उनका साथ देने को लेकर बेताब हैं। इसमें इन कंपनियों का साथ दे रही है इंटेल कैपिटल। उम्मीद है कि ये तीनों कंपनियों गोपीनाथ की इस नई कोशिश में तकरीबन 5.5 करोड़ डॉलर (275 करोड़ रुपये) का निवेश करेंगी। इस कंपनी की शुरुआत जून से होने वाली है।
उद्योग जगत के सूत्रों की मानें तो इंटेल कैपिटल ने इस कंपनी में 2.5 करोड़ डॉलर (100 करोड़ रुपये) का निवेश करने का पक्का इरादा जताया है। सूत्रों ने बताया कि, ‘इस बारे में इंटेल कैपिटल ने एक प्रस्ताव भेजा था, जिसकी समय सीमा अभी हाल में ही खत्म हुई है। कंपनी ने फिर से प्रस्ताव भेजा है।’
इसके साथ-साथ चर्चाओं के मुताबिक अब तो आईबीएम वेंचर कैपिटल ने भी इसमें हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जाहिर की है। आमतौर पर आईबीएम वेंचर कैपिटल इक्विटी में निवेश नहीं करती है, लेकिन इस बार वह 30 लाख डॉलर की इक्विटी खरीदने का इरादा बना रही है। इसका बड़ा हिस्सा नई तकनीक को हासिल करने पर खर्च किया जाएगा।
कैप्टन गोपीनाथ के करीबी सूत्रों की मानें तो सिंगापुर कार्गो भी इसमें पैसा लगाना चाहती है। वह इंटेल कैपिटल के बाद कंपनी में सबसे ज्यादा पैसा लगाएगी। वैसे, डेक्कन कार्गो के लिए निवेशकों को जुटाने का काम एडलवाइस कैपिटल कर रही है। उसे उम्मीद है कि इस कंपनी के शुरुआत के वक्त इसका कुल मूल्य 15 करोड़ डॉलर (750 करोड़ रुपये) होगी।
वैसे, इस बाबत बात करने के लिए कैप्टन गोपीनाथ उपलब्ध नहीं हो सके। कंपनी हवाई जहाज के साथ-साथ सड़क और रेल मार्ग के जरिये भी अपनी सेवाओं को ग्राहकों को उपलब्ध करवाएगी। उद्योग जगत के सूत्रों के मुताबिक इसके लिए कंपनी ने ए-310 एयरक्राफ्ट को भी किराये पर लिया है। साथ ही, इस कंपनी के मुख्य कार्यकारी (सीईओ) के तौर पर जूड फॉन्सेका को चुना गया है।
फॉन्सेका इससे पहले फेडएक्स में भी काफी वक्त तक काम कर चुके हैं। उम्मीद है कि अगले दो सालों में कंपनी 11 हवाई जहाजों के सहारे में अपने कारोबार को काफी फैला लेगी। इस कारोबार के घरेलू बाजार में डेक्कन कार्गो का सीधा मुकाबला ब्लू डार्ट, गैती, टीएनटी एक्सप्रेस और फर्स्ट फ्लाइट से होगा।
भारत सरकार ने पिछले साल जनवरी में कार्गो सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को 26 फीसदी से बढ़ाकर सीधा 74 फीसदी कर दिया था। डेक्कन कार्गो कैप्टन गोपीनाथ की तीसरी बड़ी कोशिश होगी।
इससे पहले वह चार्टर्ड फ्लाइट और सस्ती विमान सेवा के कारोबार में भी हाथ आजमा चुके हैं। उन्होंने करीब 20 महीने पहले अपनी विमान सेवा, डेक्कन एविएशन को विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस को बेच दिया था।