चीन के बाजार में उतरेगी ल्यूपिन

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 9:01 AM IST

सन फार्मा व डॉ. रेड्डीज के बाद मुंबई मुख्यालय वाली कंपनी ल्यूपिन ने चीन के बाजार में उतरने का फैसला किया है और इसके लिए योजना बना रही है। कंपनी के प्रबंध निदेशक नीलेश गुप्ता ने कहा कि फर्म का इरादा जल्द ही चीन के बाजार में उतरने का है। गुप्ता ने कहा, वास्तव में पिछले मार्च में प्रबंधन टीम को चीन का दौरा कर वहां के परिदृश्य को देखना था। महामारी के कारण यह हालांकि नहीं हो पाया। हम साल 2021 में चीन के बाजार में उतरना चाहते थे लेकिन महामारी के कारण इसमें देर हुई। उनका मानना है कि श्वसन संबंधी बीमारियों के इलाज की दवाओं के मामले में चीन में काफी संभावनाएं हैं।
गुप्ता ने कहा, हम अगले 12 महीने में चीन के बाजार में उतरने की अपनी योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं।
नवंबर 2018 में ल्यूपिन ने जापान की सहायक क्योवा फार्मा इंडस्ट्री कंपनी लिमिटेड की पूरी हिस्सेदारी प्राइवेट इक्विटी फर्म को बेच दी थी और जापान में जेनेरिक कारोबार से बाहर निकल गई थी। अब कंपनी ने स्पेशियलिटी दवाओं पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला लिया है। कीमतों में सालाना कटौती ने जापानी जेनेरिक बाजार को अनाकर्षक बना दिया है। अब फर्म का इरादा चीन के बाजार में संभावनाएं तलाशने का है।
सन फार्मा भी दुनिया केदूसरे सबसे बड़े एकल दवा बाजार में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए सक्रियता से जुटी हुई है। कंपनी ने पिछले कुछ सालों में अपने उत्पादों के पोर्टफोलियो को चीन के बाजार के लिए मजबूत बनाने के लिए कई गठजोड़ किए हैं। उदाहरण के लिए चीन के बाजार पर अपना ध्यान मजबूत करने की योजना के तहत सन फार्मा ने एस्ट्राजेनेका यूके लिमिटेड के साथ लाइसेंसिंग करार किया है, जो चीन में कुछ निश्चित ऑनकोलॉजी उत्पादों को उतारने के लिए हुआ है।
अभी ल्यूपिन के लिए अमेरिका अहम बाजार है, जो कुल राजस्व में 37 फीसदी का योगदान करता है, वहीं भारतीय बाजार का योगदान 35 फीसदी है। चीन का दवा बाजार करीब 140 अरब डॉलर का है और 1.4 अरब लोगों की आबादी वैश्विक दवा निर्माताओं के लिए आकर्षक लक्षित बाजार है।
हाल के वर्षों में चीन ने अपने दवा बाजार को खोला है, सुधार को अंजाम दिया है और मंजूरी की अवधि में तेजी लाई है।
डॉ. रेड्डीज को चीन के नियामक से साल 2019 में 11 साल के इंतजार के बाद एंटी-ब्लड क्लॉटिंग दवाओं की मंजूरी मिली। हालांकि लंबा इंतजार उसके लिए कारगर ही माना जाएगा क्योंकि उसे सितंबर 2019 में चीन के सार्वजनिक अस्पतालों में जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति को मंजूरी मिल गई।
मुंबई के एक विश्लेषक ने कहा, चीन की सरकार जेनेरिक दवाओं पर खर्च घटाने पर ध्यान दे रही है। इसने कई वैश्विक दवा निर्माताओं को चीन की रणनीति पर दोबारा विचार के लिए बाध्य किया है। रक्तचाप के इलाज व कैंसर की दवा की कीमतें हाल में घटी हैं। भारतीय कंपनियों के लिए चीन के बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का यह अच्छा समय है।
इस बीच, गुप्ता ने कहा कि उसे सहायक क्षेत्र में काफी गुंजाइश दिख रही है। गुप्ता ने कहा, तत्काल कोई योजना नहीं बनी है, लेकिन डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्र पर हमारी नजर है। इसके मौके हैं। उन्होंने कहा कि फर्म संभावना तलाश रहा है कि क्या इस क्षेत्र में उद्यम बनाया जा सकता है जिससे डॉक्टरों को बेहतर पेशकश में मदद मिल सके।

First Published : January 31, 2021 | 11:14 PM IST