प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
सरकार सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) में प्रस्तावित संशोधनों पर हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित करने की समयसीमा बढ़ा सकती है। इन संशोधनों के तहत यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र समाचार और समसामयिक विषयों पर कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर को नियमों के दायरे में लाया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने यह जानकारी दी।
वर्तमान में सरकार ने हितधारकों से 14 अप्रैल तक अपनी राय देने को कहा है। हालांकि एक और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार उद्योग, सिविल सोसायटी और स्वतंत्र व्यक्तियों को पर्याप्त समय देने के लिए इस समय सीमा को एक सप्ताह बढ़ाकर 21 अप्रैल तक किया जा सकता है। कृष्णन के अनुसार ये प्रस्तावित संशोधन ‘स्पष्टीकरणात्मक’ प्रकृति के हैं। जिनके माध्यम से स्वतंत्र समाचार और समसामयिक विषयों पर कंटेंट बनाने वालों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के दायरे में लाया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘पंजीकृत समाचार प्रकाशकों के अलावा भी कई उपयोगकर्ता समाचार संबंधी सामग्री तैयार करते हैं। इसलिए यह महसूस किया गया कि समाचार और समसामयिक सामग्री को संभालने के लिए एक ही प्राधिकरण होना चाहिए और वह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय होना चाहिए।’
कृष्णन ने स्वीकार किया कि समाचार और समसामयिक विषयों पर टिप्पणी करने वाले कंटेंट क्रिएटर का मुद्दा एक ‘धुंधला क्षेत्र या अस्पष्ट क्षेत्र’ है, जिस पर समय के साथ न्यायिक व्याख्या से स्पष्टता आएगी। उन्होंने कहा कि इस विषय पर हितधारकों के साथ निरंतर चर्चा जारी रहेगी। बदलते समाज में लोगों का यह लोकतांत्रिक अधिकार है कि वे भागीदारी करें और खबरों से जुड़ी जानकारी साझा करें।
एक अन्य अधिकारी के अनुसार उद्योग से प्राप्त फीडबैक के आधार पर सरकार यह परिभाषित करने के लिए एक अलग वस्तुनिष्ठ परिभाषा जारी कर सकती है कि समाचार और समसामयिक विषयों पर टिप्पणी क्या होती है और इसे पंजीकृत प्रकाशकों द्वारा तैयार समाचार सामग्री से कैसे अलग किया जाए?
इससे पहले दिन में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने प्रस्तावित संशोधनों पर उद्योग के साथ परामर्श बैठक की। कृष्णन ने बताया कि इस बैठक में सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधियों ने आईटी नियमों के भाग-3 के तहत इन इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म को शामिल करने पर स्पष्टीकरण मांगा। कृष्णन ने कहा, ‘उन्होंने सभी दिशानिर्देशों को एकीकृत करने का अनुरोध भी किया है, जिसे हम एक उचित मांग मानते हैं। हम देखेंगे कि इसे कैसे संभव बनाया जा सकता है। साथ ही किसी एडवाइजरी या निर्देश जारी करने से पहले परामर्श की बात भी उठी है। यह हम सामान्यतः करते ही हैं, फिर भी इस पर विचार करेंगे।’
सरकार द्वारा प्रस्तावित नवीनतम संशोधनों के तहत यह भी सुझाव दिया गया है कि सोशल मीडिया इंटरमीडियरी के लिए सरकार द्वारा जारी किसी भी सलाह को आईटी नियमों का हिस्सा माना जाएगा और उसका अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। प्रस्तावित संशोधन के मुताबिक सरकार की ऐसी सलाह इंटरमीडियरी की आवश्यक सावधानी का हिस्सा मानी जाएगी। ताकि उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा मिलती रहे।