उद्योग

खनन नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, अवैध खनन पर जुर्माना घटने से पट्टाधारकों को मिल सकती है राहत

खान और खनिज विवाद निवारण नियम 2026 के तहत तय जुर्माना और तुरंत निपटान की सुविधा से पट्टाधारकों के लिए नियमों का उल्लंघन कर बचना आसान हो सकता है

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हेमंत कुमार राउत   
Last Updated- September 14, 2026 | 10:28 PM IST

खान और खनिज (विकास एवं विनियमन – एमएमडीआर) संशोधन विधेयक, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने से कुछ दिन पहले अधिसूचित किए गए नियमों से खनिज संबंधी रियायती पट्टाधारकों के लिए नियमों का उल्लंघन करके बच निकलना पहले के लागू नियमों के मुकाबले आसान हो सकता है। विशेषज्ञों और उद्योग के हितधारकों ने यह आशंका जताई है।

खान मंत्रालय ने 30 जुलाई को ‘खान और खनिज विविवाद निवारण दंड नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की थी और ये 1 अगस्त से लागू हो गए हैं। एमएमडीआर संशोधन विधेयक को 17 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली।

ये नए नियम खनन पट्टाधारकों द्वारा किए गए उल्लंघनों से निपटने के तरीके में मौलिक बदलाव लाए हैं। उदाहरण के लिए पहले के लागू करने के तरीके के तहत आर्थिक जुर्माने को अवैध रूप से निकाले गए खनिजों की कीमत और मात्रा तथा उससे सरकारी खजाने को हुए नुकसान से जोड़ा जा सकता था। नए नियमों में सिविल-पेनल्टी तंत्र स्थापित किया है, जिसमें जुर्माने की रकम को संबंधित लोगों ने अपेक्षाकृत कम और पट्टे के आकार से जुड़ा हुआ बताया है।

इन नियमों में ‘सार-निपटान’ (तुरंत निपटान) का रास्ता भी पेश किया गया है। इसके तहत अगर पट्टाधारक निर्धारित न्यूनतम जुर्माना भर देता है और उल्लंघन को सुधार लेता है, तो बिना किसी जांच के मामले को बंद किया जा सकता है।

नए नियमों और उनके प्रभाव पर टिप्पणी मांगने के लिए खान मंत्रालय को भेजे गए विस्तृत सवालों का कोई जवाब नहीं मिला। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सवालों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

खनन क्रियान्वयन से परिचित विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इस नए ढांचे को ‘पट्टाधारक के समर्थक’ वाला बताया। उन्होंने कहा कि नियमों में सिविल पेनल्टी (जुर्माने) के लिए एक तय सीमा या दायरा तय किया गया है, जो गैर-कानूनी तरीके से निकाले गए खनिज की आर्थिक कीमत वसूलने के पुराने तरीके से अलग है।

खनन पट्टाधारकों के लिए नियमों के उल्लंघन पर पट्टे के क्षेत्र के हिसाब से जुर्माना तय किया गया है। 5 हेक्टेयर तक के पट्टे के लिए रिपोर्टिंग से जुड़ी गलतियों को छोड़कर बाकी उल्लंघनों पर प्रति हेक्टेयर 2,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगता है। 5 हेक्टेयर से ज्यादा और 50 हेक्टेयर तक के पट्टे के लिए यह जुर्माना प्रति हेक्टेयर 3,000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक है। 50 हेक्टेयर से ज्यादा और 150 हेक्टेयर तक के पट्टे के लिए प्रति हेक्टेयर 4,000 रुपये से 20,000 रुपये तक का जुर्माना है और 150 हेक्टेयर से ज्यादा के पट्टे के लिए प्रति हेक्टेयर 5,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक का जुर्माना है। कुल जुर्माना 50 लाख से ज्यादा नहीं हो सकता। रिपोर्टिंग संबंधित उल्लंघनों के लिए अलग से पट्टे के आकार के आधार पर 25,000 रुपये, 1 लाख रुपये, 2 लाख रुपये और 3 लाख रुपये की सीमा तय की गई है।

ओडिशा के पूर्व अतिरिक्त निदेशक (खान) यूसी जेना ने कहा, ‘इन नियमों से अवैध खनन में शामिल पट्टाधारकों को फायदा हो सकता है। अगर कोई पट्टाधारक निर्धारित न्यूनतम जुर्माना भरकर और उल्लंघन को सुधारकर जांच से बच सकता है, तो नियमों को लागू करने के डर का असर काफी कम हो जाता है। इससे पट्टाधारक को आसानी से निकलने का तय रास्ता मिल सकता है।’ 

First Published : September 14, 2026 | 10:11 PM IST