सैप के लिए भारत होगा प्रमुख विकास इंजन

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 5:32 AM IST

बीएस बातचीत
जर्मन सॉफ्टवेयर कंपनी सैप के लिए पिछला वर्ष कई बड़े निर्णय लेने वाला साल रहा। सैप के कार्यकारी बोर्ड के सदस्य स्कॉट रसेल ने शिवानी शिंदे के साथ साक्षात्कार में कहा कि पहली तिमाही के नतीजों पर देखें तो पता चलता है कि पिछले साले की रणनीति कारगर थी। उन्होंने इस बारे में भी बातचीत की कि भारत इस बदलाव के बीच किस तरह से मजबूत बना हुआ है। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

पिछले साल कंपनी द्वारा घोषित रणनीति पर क्या प्रभाव पड़ा है?
यदि आप पहली तिमाही को देखें तो यह आकर्षक रही। हमने पांच वर्षों में क्लाउड और सॉफ्टवेयर में प्रवेश के लिहाज से सर्वाधिक वृद्घि दर्ज की थी, वहीं परिचालन मुनाफे और मार्जिन में एक दशक में सबसे मजबूत तेजी दर्ज की। क्लाउड संबंधित हमारे पिछला ऑर्डर प्रवाह नवीनीकरण और नए सौदों में मजबूत मांग से 19 प्रतिशत तक बढ़ा। ‘राइज विद सैप’ को जनवरी के अंत में पेश किया गया था और इसमें तेजी की रफ्तार शानदार रही। यह हमारे लिए तीन अंक में बढ़ी है।

‘राइज विद सैप’ कंपनी के लिए एक बड़ा बदलाव था। इसे भारत में किस तरह से अपनाया गया है?
‘राइज विद सैप’ में महामारी की वजह से तेजी दर्ज की गई और यह ग्राहकों की प्रतिक्रिया पर आधारित थी। सैप में कुछ समय से क्लाउड की दिशा में तेजी आई है। लेकिन महामारी से आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई, प्लेटफॉर्म पर मिशन क्रिटिकल एप्लीकेशनों के अमल में स्वायत्तता में सक्षम होने की जरूरत थी। प्रतिक्रिया बेहद मजबूत थी। हमारे पास 100 से ज्यादा नई कंपनियां थीं और मौजूदा ग्राहक ‘राइज विद सैप’ की दिशा में बढ़ रहे हैं और इससे संबंधित ऑर्डर प्रवाह मजबूत है। भारत ने वर्ष की शुरुआत शानदार तरीके से की है। हमारा क्लाउड व्यवसाय सालाना आधार पर 205 प्रतिशत बढ़ा, पहली तिमाही में रिन्यूअल में 111 प्रतिशत तक की वृद्घि दर्ज की गई, भारत में हमारा क्लाउड बैकलॉग भी दो अंक में बढ़ रहा है। इस तिमाही में हमने सबसे ज्यादा नए ग्राहक जोड़े।
हमने इसे लेकर भी घोषणा की कि हम अपनी मल्टी क्लाउड रणनीति को स्थानीय डेटा केंद्रों में क्रियान्वित करने के लिए 500 करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं। हमें ये निवेश पूरे होने और इनमें तेजी बरकरार रहने की उम्मीद है। भारत वैश्विक रूप से सैप के लिए एक प्रमुख विकास इंजन होगा, लेकिन साथ ही यह क्लाउड और डिजिटलीकरण प्रक्रिया में तेजी की दिशा में नवप्रवर्तक भी होगा।

एसएमई ने सैप को अपनाने पर ज्यादा जोर दिया है। वे महामारी से कितने प्रभावित हुए हैं?
हमने महामारी के दौरान अपने एसएमई ग्राहकों के साथ लगातार सहयोग बनाए रखा है। अपने बिजनेस मॉडल बदलने के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल या क्लाउड को स्वतंत्र रूप से अपनाने की अनुमति देना हमारा मुख्य फोकस रहा है। एसएमई सेगमेंट सैप के लिए महत्वपूर्ण है। 9,500 एसएमई ने सैप के साथ काम किया है। यह एक चुनौतीपूर्ण अवधि रही, लेकिन हमने देखा कि एसएमई अपने विजन को बनाए रखने के लिए मैकेनिज्म पर जोर दे रहे हैं और उन्हें ऐसे पार्टनर की जरूरत है जो उन्हें गति प्रदान कर सके।
महामारी की वजह से डिजिटलीकरण में तेजी आई है। भारत में इस संबंध में आपका अनुभव कैसा रहा है?
शुरुआती सतर्कता के बाद, यह स्पष्ट हुआ है कि यदि संगठन मजबूत बने रहना चाहते हैं तो उन्हें अपनी क्षमताओं पर जोर देने की जरूरत है। वास्तविकता यह है कि क्लाउड ऐसे मॉडलों के क्रियान्वयन के लिए एक उपयुक्त विकल्प है जो स्वायत्तता में मददगार हों और नवाचार को भी बढ़ावा देते हों। हमने महसूस किया है कि डिजिटलीकरण अब कंपनियों के एजेंडे में ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

First Published : April 24, 2021 | 12:06 AM IST