मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रिलायंस फार्मास्युटिकल्स को एक बड़ी दवा निर्माता कंपनी के तौर पर स्थापित करने की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
वजह है तेल की लगातार गिरती कीमतें, कम हो रहे रिफाइनिंग मार्जिन और अनिल अंबानी की रिलायंस पावर के साथ गैस की कीमतों के बाबत चल रही अदालती जंग। कंपनी ने फिलहाल इसकी जगह ऐसी कंपनी को बनाने का फैसला किया है, जो बल्क दवाओं का निर्माण करेगी।
यह कंपनी अगले साल छह थोक दवाओं या एक्टिव फार्मास्युटिकल्स इंग्रीडिटेंट्स (एपीआई) को बाजार में उतारेगी। इससे पहले कंपनी ने अगले दो-तीन सालों में रैनबैक्सी और डॉ. रेड्डीज जैसी बड़ी फार्मा कंपनियों की तर्ज पर एक कंपनी बनाने की योजना बनाई थी।
रिलायंस लाइफ साइंसेज (आरएलएसएल) के अध्यक्ष के.वी. सुब्रमण्यम ने बताया कि, ‘हमने बड़े स्तर पर विकास की अपनी सारी परियोजनाओं को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इसकी जगह पर हम इस प्रोजेक्ट के तहत इस वक्त करीब 10 थोक दवाओं के साथ शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं।’
रिलायंस समूह के पूर्ण स्वामित्व वाली यह कंपनी, मुकेश अंबानी समूह के हेल्थकेयर कारोबार का संचालन करती है। सात साल पुरानी यह कंपनी बायोटेक, दवा अनुसंधान, स्टेम सेल रिसर्च, बायोडीजल उत्पादन, कॉर्ड बल्ड बैंकिंग और क्लिनिकल रिसर्च के क्षेत्र में इस वक्त काम कर रही है।
रिलायंस लाइफ साइंसेज ने गुजरात के जामनगर में बन रहे सेज में 1,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है। कंपनी की यहां एक मल्टी ड्रग मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में इस पैसे को लगाने की योजना थी। इसकी जगह कंपनी ने नवी मुंबई स्थित अपने मुख्यालय में ही एक शुरुआती निर्माण केंद्र को स्थापित करने का फैसला किया है। यहां पर वह थोक दवाओं का निर्माण करेगी।
सुब्रमण्यम ने बताया कि रिलायंस फार्मास्युटिकल्स सिर्फ कैंसर, स्टरॉयड और हारमोन्स से जुड़ी महंगी थोक दवाओं का ही निर्माण करेगी। उम्मीद है कि अगले साल तक ऑनक्लॉजी और स्टरॉयड्स सेगमेंट की छह दवाएं बाजार में उतारे जाने के लिए तैयार हो जाएंगी।
रिलायंस फार्मास्युटिकल्स की नींव आरएलएसएल ने एक साल पहले रखी थी। इसके तहत कई दवाओं को विश्व बाजार में उतारे जाने की योजना बनाई गई थी। इसकी सीधा टक्कर रैनबैक्सी, डॉ. रेड्डीज, सन फार्मा जैसे देसी और इस्राइल की टेवा फार्मास्युटिकल्स और अमेरिकी मायलान लैब जैसे विदेशी कंपनियों से होने की उम्मीद थी।
वॉर्कहार्ट के पुराने कार्यकारी ललित कुमार को इस कंपनी का मुख्य कार्यकारी और अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने मई, 2007 में कहा था कि, ‘जामनगर के निर्माण केंद्र पर काम 2007 के अंत तक हो शुरू हो जाएगा और वह अगले 18 महीनों में तैयार हो जाएगा। इस केंद्र की उत्पादन क्षमता सैंकड़ों टन की होगी।’
अब तो ललित कुमार और उनके साथ कंपनी में प्रबंधन से जुड़े कई लोग भी इसका दामन छोड़ चुके हैं। सुब्रमण्यम ने ललित कुमार के कंपनी छोड़ने की खबर की पुष्टि की है।