अगर आप अपनी कार का बीमा कराने जा रहे हैं, तो अपनी आंखों की जांच करवा लें और अपने स्कूली सर्टिफिकेट भी संभालकर रख लें। और हां, अगर आपकी कार का रंग लाल है, तो जेब हल्की करने के लिए भी तैयार हो जाएं।
दरअसल कार बीमा करने वाली कंपनियां अब इन्हीं पैमानों को देखकर आपकी कार का प्रीमियम तय करेंगी। बीमा करने वाली कंपनियों ने एक डाटाबेस तैयार करना शुरू कर दिया है। अगले दो साल तक इसे तैयार कर लिया जाएगा और प्रीमियम की गणना करते समय इसका इस्तेमाल भी किया जाएगा।
कंपनियों ने इसकी शुरुआत वाणिज्यिक वाहन मसलन ट्रक और बस ड्राइवरों से की है क्योंकि उन्हीं की ओर से ज्यादा दावे होते हैं। नेशनल इंश्योरेंस के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक वी रामासामी ने इस बात की तसदीक की।
उन्होंने कहा, ‘हम बारीक से बारीक बात का ध्यान रखेंगे, मसलन ड्राइवर की शिक्षा, उसका अनुभव वगैरह। बीमा का प्रीमियम इन्हीं सब बातों से तय किया जाएगा।’
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक जी श्रीनिवासन ने भी कहा कि इसके लिए क्षेत्रीय ट्रांसपोर्टरों से हाथ मिलाया जा सकता है।
हालांकि यह काम बड़ा होगा और इसमें वक्त भी लगेगा, लेकिन जब से बीमा कंपनियों को प्रीमियम तय करने की छूट मिली है, उन्होंने इस बारे में सोचना शुरू कर दिया है। मोटर बीमा पर कंपनियों का ज्यादा ध्यान इसलिए है क्योंकि उनकी प्रीमियम आय का 45 से 50 फीसदी हिस्सा यहीं से आता है।
प्रीमियम के लिए कंपनियां पैमाने भी दिलचस्प तय कर रही हैं। मसलन ओरियंटल इंश्योरेंस के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एम रामदास कहते हैं, ‘प्रीमियम की दर दावा करने वाले के अनुभव, इलाके में भीड़ की स्थिति और सड़कों आदि पर निर्भर करेगी।
दिल्ली में भीड़भाड़ बहुत है और वहां दुर्घटनाएं तथा चोरी की घटनाएं ज्यादा होने की वजह से दावे भी ज्यादा होते हैं। इसलिए दिल्ली में कार बीमा का प्रीमियम ज्यादा होगा।’
प्रीमियम तय करते समय वाहन पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। उदाहरण के लिए इंडिका कार के मालिक को ज्यादा प्रीमियम देना होगा क्योंकि आम तौर पर उनका इस्तेमाल टैक्सी के तौर पर होता है।
इसी तरह मर्सिडीज में दुर्घटना होने पर दावा तगड़ा होता है, इसलिए प्रीमियम भी ज्यादा होगा। गाड़ी के रंग की भी प्रीमियम तय करने में बड़ी भूमिका होगी। गहरे रंग मसलन लाल रंग की कार के मालिकों को ज्यादा प्रीमियम अदा करना होगा।
एक बीमा कंपनी के अधिकारी ने कहा, ‘हालांकि आंकड़े रंगों के बारे में कुछ नहीं कहते, लेकिन विदेशों में हुए अध्ययनों के मुताबिक युवा पीढ़ी ही ऐसे चटक रंग पसंद करती है और उनके वाहनों की दुर्घटना भी ज्यादा होती है।’
आंखें कमजोर, तो प्रीमियम होगा ज्यादा
पढरई कम, प्रीमियम तगड़ा
कार का रंग गहरा होने पर भी जेब को लगेगा झटका
दिल्ली में प्रीमियम ज्यादा