देश के निवेश माहौल की ‘सॉवरिन रेटिंग’ घटाकर ‘स्थिर’ से ‘नकारात्मक’ करने के स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स के कदम की सरकार ने कड़ी आलोचना की है। असंतुष्ट सरकार ने संस्था से देश की रैंकिंग घटाने की वजह पूछी है।
हालांकि इस रेटिंग एजेंसी ने बीते 24 फरवरी को देश की वित्तीय दशा में आई गिरावट को इसकी वजह बताई थी। स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स ने देश का वित्तीय अनुमान ‘डाउनग्रेड’ से बढ़ाकर ‘सब-इंवेस्टमेंट ग्रेड’ करने के बावजूद इसकी रेटिंग में कोई परिवर्तन नहीं किया। इसे पहले जितना यानी ‘बीबीबी निगेटिव’ ही रखा गया है।
इस घटना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, वित्त मंत्री ने स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि भारत लगातार दुनिया में तेज गति से तरक्की कर रही अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। इतना ही नहीं, इसने अपने वादे को हमेशा ही निभाया है। सरकार ने यह भी कहा है कि वित्तीय घाटा बढ़ने की वजह कुछ और नहीं आर्थिक मंदी है।
अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने के लिए सरकारों के कदमों के चलते भी राजकोष पर असर पड़ा है। एक अधिकारी ने कहा, ‘स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स का मूल्यांकन तर्कपूर्ण और भरोसेमंद नहीं है। हम मूल्यांकन की उनकी पद्धति समझना चाहते हैं। हम यह भी जानना चाहते हैं कि आखिर दूसरे देशों की रेटिंग होती किस तरह से है।’
अधिकारी के मुताबिक, ‘यह सही है कि निजी निवेश बिल्कुल कम हो गया है, लेकिन सरकार की कोशिशों से इसमें बढ़ोतरी हो रही है। सरकार ने अपनी ओर से निवेश में वृद्धि की है, जिससे वित्तीय घाटा थोड़ा बढ़ा है।’ वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने हाल में जारी ताजा रिपोर्ट में देश की अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया है।
इस अधिकारी के मुताबिक, ‘स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स छोड़ भारतीय अर्थव्यवस्था से कोई भी चिंतित नहीं है।’ समझा जा रहा है कि वित्त मंत्रालय की इस आपत्ति के बाद स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स का एक दल जल्द ही मंत्रालय के साथ बात करेगा। दूसरी ओर, सरकार दो अन्य बड़ी रेटिंग एजेंसियों मूडीज और फिच के संपर्क में है।
सरकार ने इन दोनों एजेसियों से वित्तीय रणनीति और समूचे आर्थिक हालात का ब्यौरा देने को कहा है। हालांकि सभी रेटिंग एजेंसियां बढ़ते घाटे पर अपनी चिंता जता चुकी हैं। गौरतलब है कि एसऐंडपी ने 24 फरवरी को आर्थिक परिदृश्य की रेटिंग घटा दी थी। हालांकि रेटिंग आउटलुक को अपरिवर्तित ही छोड़ दिया था। दो अन्य रेटिंग एजेंसियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि वे अगला कोई कदम उठाने के लिए चुनाव और पूर्ण बजट का इंतजार करेंगी।