देश की चौथी सबसे बड़ी कंपनी की हैसियत हासिल कर चुकी सत्यम कम्प्यूटर सर्विसेज में उठे तूफान के बाद आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा कंपनी को विशाखापत्तनम में आवंटित किए गए भूखंड को वापस लिया जा सकता है।
राज्य सरकार ने एक कैबिनेट मंजूरी के बाद दिसंबर में विशाखापत्तनम-भिमिली रोड पर कपुलाउप्पडा गांव में कंपनी को 50 एकड़ भूमि आवंटित करने पर सहमति जताई थी।
एक आईटी पार्क की स्थापना के लिए लगभग चार साल पहले कंपनी लिए निर्धारित किए गए एक भूखंड के बदले में यह आवंटन किया गया था।
हालांकि इस भूखंड का हक अभी तक स्थानांतरित नहीं किया गया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए हम कंपनी को आवंटित किए गए भूखंड को रद्द करने की योजना बना रहे हैं।’
आर्थिक मामलों के पूर्व केंद्रीय सचिव ईएएस शर्मा, जो गैर-सरकारी संगठन फोरम फॉर बेटर विशाखा के संयोजक भी हैं, ने सरकार पर आरोप लगाया था कि वह अनुमानित रूप से 3 करोड़ रुपये की यह भूमि कंपनी को महज 1 करोड़ रुपये में दे रही है।
ऐसे आरोपों का खंडन करते हुए वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यह भूमि आईटी क्षेत्र में रोजगार संभावनाओं को ध्यान में रख कर आवंटित की गई और इसमें सभी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया।’
विशाखापत्तनम स्थित अरुणा कंस्ट्रक्शंस ऐंड डेवलपर्स के प्रबंध भागीदार बीआरके राजू के मुताबिक बीच रोड भूमि की कीमत फिलहाल 1-1.25 करोड़ रुपये प्रति एकड़ है। संपत्ति में आए उछाल के दौरान यह 2 करोड़ रुपये प्रति एकड़ पर पहुंच गई थी।
50 एकड़ के इस भूखंड के लिए सत्यम ने 5 करोड़ रुपये चुकाए थे। जब इस बारे में बिजनेस स्टैंडर्ड ने राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार सचिव अजय मिश्रा से संपर्क किया तो उन्होंने कहा, ‘भूमि के लिए मूल्य निर्धारण में अंतर हमेशा बना रहेगा, क्योंकि इसकी नीलामी नहीं की गई है।’