सर्दी तो सर्दी गर्मी में भी ठंडा रहेगा परिधान बाजार!

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 1:57 AM IST

सर्दियों के  मौसम में हुई कम बिक्री को देखते हुए परिधान कारोबारी अपनी खरीद कम करने की योजना बना रहे हैं। परिधान कारोबारियों ने गर्मी के मौसम की अपनी खरीद लगभग 20 फीसदी कम करने का फैसला किया है।
लगभग 2 हफ्ते गर्म कपड़ों की बिक्री करने और 20-25 फीसदी की छूट देने के बाद भी दुकानदारों के पास 15-20 फीसदी माल बचा हुआ है। आमतौर पर दुकानदार फरवरी के मध्य से गर्म कपड़ों पर छूट देते थे। लेकिन इस बार खरीदारी से बच रहे ग्राहकों को लुभाने के लिए दुकानदारों ने जनवरी के मध्य से ही गर्म कपड़ों पर 80 फीसदी तक क ी छूट देनी शुरू कर दी।
परिधान रिटेल इकाई कुटोन्स के अध्यक्ष बलविंदर सिहं अहलूवालिया ने बताया, ‘हम गर्मी के मौसम के लिए लगभग 10-20 फीसदी कम माल खरीदेंगे। क्योंकि इस साल इसी अनुपात में सर्दियों के दौरान होने वाली हमारी कमाई भी कम हुई है।’
विशाल रिटेल के मुख्य कार्याधिकारी मनमोहन अग्रवाल ने बताया कि 31 दिसंबर 2008 तक उनके पास लगभग 813 करोड़ रुपये का माल बचा हुआ है। इसीलिए वह भी गर्मी के  लिए लगभग 20 फीसदी कम माल ही खरीदेंगे।
कारोबार सलाहकार एजेंसी टेक्नोपेक के उपाध्यक्ष पुरनेंदु कुमार ने बताया, ‘सर्दियों में हुई कम बिक्री को देखते हुए कारोबारी अब काफी सोझ-समझकर फैसला कर रहे हैं। 

गर्मियों में कम माल खरीदने का यह फैसला काफी बुद्धिमानी भरा है। क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करेंगे तो आने वाले महीनों में उन्हें कार्यशील पूंजी की कमी हो सकती है।’ 
कम बिक्री के कारण साल 2009 में भी भारतीय कारोबारियों को पूंजी की कमी, मार्जिन पर दबाव और खराब आर्थिक हालात से जूझना पड़ सकता है। फिच के एक विश्लेषक ने बताया, ‘कम बिक्री से गोदामों में ज्यादा माल बचा हुआ है। इसके साथ ही बढ़ती लागत से निपटना भी घरेलू क ारोबारियों के लिए काफी मुश्कि ल हो रहा है।’
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार साल भर में होने वाली बिक्री की कुल 40 फीसदी बिक्री अक्टूबर-दिसंबर के दौरान ही होती है। लेकिन इस साल यह आंकड़ा घटकर मात्र 25 फ ीसदी ही रह गया है। इस कारण दुकानदारों को माल बेचने के लिए ग्राहकों को काफी छूट देनी पड़ रही है। इससे उनकी मार्जिन पर काफी दबाव पड़ रहा है।
आमतौर पर परिधान कारोबार में 30-35 फीसदी का मार्जिन होता है। दुकानदार लगभग 60 फीसदी माल पूरे दाम पर और बाकी माल लगभग 20-25 फीसदी छूट पर बेच देते हैं। एक विश्लेषक ने बताया, ‘लेकिन अब गणित बिल्कुल उल्टा हो गया है। अब अधिक माल छूट पर बेचा जा रहा है। इससे उनकी मार्जिन में 10-15 फ ीसदी की कमी और आने की आशंका है।’

First Published : February 23, 2009 | 2:00 PM IST