पैंटालून रिटेल इंडिया (लिमिटेड) कारोबार को मजबूत करने के लिए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) हासिल करने की जुगत भिड़ा रही है।
इसीलिए कंपनी ने दो अलग-अलग कंपनियां बनाने का फैसला किया है। इसके जरिये वह अपने कारोबार के लिए एफडीआई हासिल कर लेगी क्योंकि भारतीय कानून के मुताबिक सीधे किसी रिटेल कंपनी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नहीं हो सकता।
इसी साल फरवरी में बदले नियमों के मुताबिक किसी भी परिचालन सह निवेश कंपनी में 49 फीसदी तक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश हो सकता है, बशर्ते उसका स्वामित्व और संचालन किसी भारतीय कंपनी के पास हो। पैंटालून भी इसी संशोधन पर काम कर रही है।
इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ बैंकर ने बताया कि रिटेल कंपनी में निवेश करने वाली कंपनी एफडीआई हासिल कर सकती है, जो आखिरकार रिटेल कंपनी को ही मिल जाएगा। कंपनी की नई योजना के तहत पैंटालून एक पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी फ्यूचर फैशन मर्केंडाइजिंग लिमिटेड (एफएफएमएल) बनाएगी।
इसमें निवेश भी होगा और परिचालन का काम भी यह करेगी। हसमें समूह के फैशन और प्राइवेट लेबल वाले परिधानों का कारोबार समाहित किया जाएगा। किशोर बियाणी समेत तमाम प्रमोटरों ने पैंटालून रिटेल में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51 फीसदी करने का फैसला किया है। इसके लिए वे तरजीही आधार पर शेयर और वारंट खरीदेंगे।
इस तरह एफएफएमल को भारतीय कंपनी माना जाएगा। चूंकि इसमें फैशन और प्राइवेट लेबल के कारोबार होंगे, इसलिए एफडीआई संबंधी तमाम प्रतिबंध इस पर लागू नहीं होंगे और उसे एफडीआई हासिल करने की अनुमति मिल जाएगी। कंपनी की योजना विदेशी निवेशकों और प्राइवेट इक्विटी कंपनियों के जरिये 750 करोड़ रुपये उगाहने की है।
कंपनी की दूसरी सहयोगी कंपनी फ्यूचर कंज्यूमर एंटरप्राइजेज (एफसीई लिमिटेड) होगी, जिसका पूर्ण स्वामित्व एफएफएमएल के पास होगा। एफसीई लिमिटेड परिचालन कंपनी होगी और उसमें रिटेल कारोबार होगा यानी एफएफएमएल रिटेल कारोबार में भी निवेश करेगी।
बैंकर ने बताया कि यह रकम विदेशी प्रत्यक्ष निवेश मानी जाएगी, लेकिन एफएफएमएल को इसकी अनुमति मिल जाएगी क्योंकि वह ऐसे किसी भी कारोबार से नहीं जुड़ी है, जिनमें कोई प्रतिबंध लगा हो। सोने पर सुहागा यह है कि भारतीय प्रमोटरों के पास कंपनी की 51 फीसदी हिस्सेदारी होगी, इसलिए उसे भारतीय कंपनी माना जाएगा और वह किसी भी कंपनी में निवेश कर सकेगी।
इस बारे में पूछे जाने पर फ्यूचर समूह के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम समूह के कारोबार को नए ढांचे में ढाल रहे हैं, जिससे हमें बेहतर काम करने का मौका मिलेगा और शेयरधारकों को भी फायदा होगा।’ लेकिन इस बारे में और ब्योरा देने से इनकार करते हुए प्रवक्ता ने कहा, ‘समूह विभिन्न तरीकों से संसाधन जुटाने की कोशिश कर रहा है।’
फ्यूचर समूह दो खेपों में तकरीबन 1,150 करोड़ रुपये जुटाने की फिराक में है। इनमें 750 करोड़ रुपये नई सहयोगी कंपनी के जरिये जुटाए जाएंगे। 368 करोड़ रुपये पैंटालून रिटेल में उगाहे जाएंगे, जिसका नाम बदलकर फ्यूचर मार्केट्स ऐंड कंज्यूमर ग्रुप लिमिटेड (एफएमसीजी लिमिटेड) करने का समूह का इरादा है।
बियाणी की सयानी जुगत
नए कानूनों के तहत एफडीआई मंगाने की तैयारी
पैंटालून की बनेंगी दो सहयोगी कंपनियां
उनमें एफडीआई पर नहीं है कोई प्रतिबंध
इकट्ठा किया जाएगा 750 करोड़ रुपये का एफडीआई
रकम का इस्तेमाल होगा रिटेल कारोबार में
बियाणी और प्रमोटर बढ़ाएंगे हिस्सेदारी