निराश रिटेलरों को अब छूट का सहारा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 1:26 AM IST

अंतरिम बजट में सरकार की तरफ से कुछ भी नहीं मिलने के बाद अब रिटेलरों ने छूट और ऑफरों की तादाद को बढ़ा दिया है।
उन्हें उम्मीद है कि कम से कम इसकी वजह से तो खरीदार उनकी ओर रुख करेंगे और वे लागत निकाल सकेंगे। 

रिटेलरों और उद्योग विश्लेषकों की मानें तो इस सेक्टर को काफी उम्मीद थी कि सरकार प्रत्यक्ष करों में कटौती करेगी, जिससे उनकी लागत काफी नीचे आ जाती। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
विशाल रिटेल के मुख्य कार्यकारी मनमोहन अग्रवाल का कहना है कि, ‘उपभोक्ताओं के हाथों में ज्यादा पैसे सौंप कर और प्रत्यक्ष करों में कटौती करके सरकार मांग में तेज इजाफा कर सकती थी। लेकिन अंतरिम बजट में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। अब हम खुद के सहारे हैं और हम खुद के सहारे ही इस तूफान को पार भी कर लेंगे।’
नगदी में कमी और मंदी के महौल की वजह से ही 2008 में संगठित रिटेल क्षेत्र की विकास दर गिरकर 15 फीसदी पर आ गई. जबकि 2007 में यही दर 25 फीसदी के आस-पास थी। अपना माल बेचने के लिए रिटेलरों को आज की तारीख में 80 फीसदी तक की छूट देनी पड़ रही है।
मैक्स और लाइफस्टाइल जैसे रिटेल चेन चलाने वाली कंपनी लैंडमार्क ग्रुप के निदेशक (फाइनैंस) पी.वी.के. सुंदरम का कहना है कि, ‘पिछले कुछ सालों के मुकाबले इस बार रिटेलर काफी जबरदस्त छूट दे रहे हैं। अब कौन कितनी छूट दे सकता है, यह तो अलग-अलग रिटेलर पर ही निर्भर करता है। लेकिन एक बात तय है, जब तक लोगों को कोई चीज पसंद नहीं आने वाली, वे उसे नहीं खरीदने वाले।’
वैसे, रिटेलरों को एक उम्मीद यह भी थी कि वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) में सरकार कटौती करेगी। इस वक्त जूतों पर 12.5 फीसदी का और कपड़ों पर चार फीसदी का वैट चुकाना पड़ता है। अगर वैट में कटौती कर दी गई होती, तो कपड़ों और जूतों की लागत काफी कम हो गई होती।
लिलिपुट किड्सवियर के उपाध्यक्ष (रिटेल) कमल गुप्ता का कहना है कि, ‘जूतों पर 12.5 फीसदी का वैट असल में इस उद्योग का दम घोंट रहा है। सरकार को मांग में इजाफे करने की खातिर इसे घटा कर आठ फीसदी कर देना चाहिए था।’
इस उद्योग के विश्लेषक भी रिटेलरों की मांगों से इत्तेफाक रखते हैं। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के निदेशक आनंद रघुरमन का कहना है कि, ‘बजट काफी निराशाजनक रहा है। रिटेलर ज्यादा दिनों तक अपनी सेल्स में इजाफा करने के लिए छूट के सहारे नहीं रह सकते हैं।
इस बात की सबसे अच्छी नजीर है सुभिक्षा, जिसने बता दिया कि छूट के भरोसे आप अपनी कारोबार नहीं चला सकते हैं। अगले कुछ महीनों में इस सेक्टर में और भी उठा-पटक देखने को मिल सकती है।’

First Published : February 17, 2009 | 11:04 PM IST