मार्च तिमाही में बढ़ा नई परियोजनाओं पर खर्च

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 6:22 AM IST

दिसंबर तिमाही की तुलना में मार्च तिमाही में नई परियोजनाओं का मूल्य 13.2 प्रतिशत बढ़ा है। हालांकि यह पिछले साल मार्च की तुलना में 69.3 प्रतिशत कम है। नई परियोजनाओं में दीर्घावधि संपत्तियों पर किया गया खर्च शामिल होता है, जिसमें कंपनियों द्वारा स्थापित की जाने वाली फैक्टरियां और सरकार की ओर से सड़क निर्माण जैसे काम शामिल होते हैं। इस तरह के पूंजीगत व्यय या कैपेक्स आर्थिक वृद्धि के लिए अहम होता है।
परियोजनाओं पर नजर रखने वाले सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2021 में नई परियोजनाओं का मूल्य 1.2 लाख करोड़ रुपये था, जो दिसंबर 2020 में 1.06 लाख रोड़ रुपये और मार्च 2020 में 3.91 लाख करोड़ रुपये था। पूरी हो चुकी परियोजनाएं पिछले साल की तुलना में 69.4 प्रतिशत कम हैं और यह 0.53 लाख करोड़ रुपये की रहीं। यह दिसंबर तिमाही की तुलना में 31.2 प्रतिशत कम हैं।
नई परियोजनाएं स्थापित करने को लेकर कंपनियां सुस्त हैं, क्योंकि मौजूदा फैक्टरियों की क्षमता का ही पूरा इस्तेमाल नहीं हो रहा है। क्षमता का उपयोग कोविड-19 महामारी के बाद सुस्त हुआ है, जिसकी जानकारी जुलाई सितंबर तिमाही के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के हाल के ऑर्डर बुक्स, इनवेंट्रीज ऐंड कैपेसिटी युटिलाइजेसन सर्वे (ओबीआईसीयूएस) से मिलती है। हालांकि यह आंकड़ा पहले का है। सितंबर 2020 के आंकड़े फरवरी 2021 में जारी किए गए थे।
इसमें कहा गया है, ‘2020-21 की पलती तिमाही में 47.3 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट के बाद समग्र स्तर का क्षमता उपभोग (सीयू) 2020-21 की दूसरी तिमाही में 63.3 प्रतिशत बहाल हुआ है। वहीं मौसमी समायोजित सीयू भी 2020-21 की दूसरी छमाही में इसके पहले की तिमाही के 47.9 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 64.1 प्रतिशत हो गया है।’
कई देशों में वित्तीय सेवाएं देने वाले जेफरीज समूह की एक शोध रिपोर्ट ‘क्वांटामेंटल्स माइक्रोस्ट्रैटजी- मार्जिन रिस्क फ्रॉम इन्फ्लेशन’ में 12 मार्च 2021 को कहा गया है कि अनिश्चित वातारवरण में पूंजीगत व्यय सुस्त ोहना वैश्विक लक्षण है।
रिपोर्ट के मुताबिक 2008 के आसपास आए वैश्विक वित्तीय संकट (जीएफसी) के दौरान कम मुनाफे के बावजूद कंपनियां निवेश जारी रखने को इच्छुक थीं।
जेफरी टोंग के माइक्रोस्ट्रैटजी एनलिस्ट महेश केडिया ने कहा, ‘जीएफसी के पहले कंपनियां मजबूत आर्थिक वृद्धि के साथ जगह बनाने की कवायद करती थीं और कभी कभी ज्यादा व्यय करती थीं।’
ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई डायरेक्ट में शोध प्रमुख पंकज पांडेय ने कहा कि धारणा पर असर उतना गंभीर नहीं है, जितना कि  पिछले साल था, जब मार्च के अंत में कोरोना के मामले बढ़ रहे थे। अब यह उम्मीद की जा रही है कि लॉकडाउन से बचा जाएगा और कुछ क्षेत्रों में मांग में सुधार हुई है, जिससे क्षमता विस्तार की संभावना बढ़ी है। उन्होंने कहा, ‘आपकी जेब में पैसे हैं, ऐसे में कंपनियों ने निवेश शुरू कर दिया है।’ पांडेय के मुताबिक सीमेंट कंपनियों के क्षमता के इस्तेमाल में सुधार ुहआ है और पूंजीगत व्यय बढ़ा है। उन्होंने कहा कि स्टील क्षेत्रमें भी आने वाले दिनों में निवेश हो सकता है।
आईडीएफसी असेट मैनेजमेंट कंपनी में अर्थशास्त्री (फंड प्रबंधन) श्रीजीत बालासुब्रमण्यन ने कहा कि कोविड-19 के निचले स्तर से वापसी की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘चक्रीय रिकवरी हो रही है।’ उन्होंने कहा कि सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना से कुछ क्षेत्रों में विनिर्माण को प्रोत्साहन मिला है, जो चुनिंदा क्षेत्रों के लिए सकारात्मक है। सरकार ने फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अलावा कुछ अन्य क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजना की घोषणा की है।

First Published : April 2, 2021 | 12:10 AM IST