एस्सार ऑयल हालांकि पिछले 6 साल से खुदरा ईंधन (पेट्रोल और डीजल) का कारोबार कर रही है, लेकिन उसे सिर्फ 4 महीने से ही मुनाफा मिलना शुरू हुआ है।
कंपनी के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत के रिकॉर्ड बनाने के बाद उसमें आई गिरावट से कंपनी की सेहत सुधरी है। उल्लेखनीय है कि एस्सार ऑयल ने 2003 में खुदरा ईंधन कारोबार में कदम रखा था।
हालांकि पिछले साल कच्चे तेल की कीमतों में आए उफान के बावजूद सरकार द्वारा तेल पर दी जा रही सब्सिडी से प्रतिस्पर्धा करने में एस्सार नाकाम रही थी। इस चलते कंपनी को अपने काफी फ्यूल स्टेशन बंद कर देने पड़े थे। तब कंपनी के केवल 80 स्टेशन ही चालू थे।
हालांकि तेल की कीमत कम होने के बाद कंपनी ने अपने 1,165 बंद पड़े पेट्रोल पंप दुबारा खोल दिए। मार्च में कच्चा तेल औसतन 45.62 डॉलर प्रति बैरल की दर से बिक रहा था।
एस्सार ऑयल के सीईओ (मार्केटिंग) एस. थंगापांडियन ने कहा, ‘पिछले सिर्फ 4 महीने से हमें खुदरा ईंधन पर मुनाफा मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतें यदि इसी तरह नीचे बनी रही तो अगले वित्त वर्ष के आखिर तक हम अपने घाटा पूरा कर लेंगे।’
एस्सार के प्रतिद्वंद्वियों की मानें तो इसे प्रति महीने 27 लाख रुपये का मुनाफा हो रहा है। एस्सार द्वारा बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल के आधे का स्रोत जहां एस्सार की अपनी रिफाइनरी है, वहीं आधे का स्रोत सार्वजनिक रिफाइनरी है।
कंपनी के ज्यादातर फ्यूल स्टेशन बंद होने से उसे अपने डीलरों को सालाना 100 करोड़ रुपये का हर्जाना देना पड़ रहा था। परिणामस्वरूप, इसका घाटा बढ़कर 400 करोड़ रुपये का हो गया था।
एस्सार ऑयल इस समय ईंधन की बिक्री सार्वजनिक कंपनियों की दर पर ही कर रही है। इससे डीजल पर प्रति लीटर 1 से 3 रुपये का मुनाफा मिल रहा है। फिलहाल पेट्रोल पर कोई मार्जिन नहीं मिल रहा है। कंपनी के मुताबिक, वह हर महीने करीब 90 हजार किलोलीटर तेल बेच रही है। उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में यह बिक्री बढ़कर 1.20 किलोलीटर हो जाएगी।