मंदी से निपटने के वास्ते नई राह चली एम्फैसिस

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 7:06 PM IST

मंदी से निपटने के लिए आईटी कंपनियां आजकल अलग-अलग उपाय कर रही हैं। इसी कवायद के तहत आईटी और बीपीओ सेवा प्रदाता कंपनी एम्फैसिस अब अपने फिक्स्ड कॉस्ट को वेरियेबल कॉस्ट में बदल रही है।
वैसे, अभी कंपनी को उन फिक्स्ड कॉस्ट के बारे में फैसला करना है, जिसे वह वेरियेबल कॉस्ट में बदलेगी, लेकिन अनुमान यही है कि इसकी शुरुआत सैलरी और बुनियादी ढांचे की लागत से होगी।
कंपनी के सीईओ गणेश अय्यर ने बताया कि, ‘जब वक्त बुरा चल रहा हो, तो हम लागत को स्थिर नहीं बनाए रखना चाहते हैं। हमारा फोकस अपनी वित्तीय सेहत को बरकरार रखना है।’ मंदी के इस दौर में कई आईटी कंपनियां ने पहले ही कह दिया है कि सैलरी के वेरियेबल हिस्से पर असर पड़ना लाजिमी है।
सैलरी का वैरियेबल हिस्सा कंपनी की कमाई और परिचालन मुनाफे से जुड़ा होता है। वरिष्ठता के आधार पर यह कुल सैलरी का 25 से 30 फीसदी हिस्सा होता है। एम्फैसिस में इस वक्त 30 हजार लोग काम कर रहे हैं। इसमें बीपीओ कारोबार से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं।
कंपनी ने कहा कि इस वक्त तो सैलरी में किसी तरह की कटौती नहीं की गई है, लेकिन आगे के बारे में वह कुछ नहीं कह सकती। अय्यर ने बताया, ‘हम अभी देखेंगे कि बाजार की क्या हालत है। अगर हालत सचमुच बहुत बुरी हुई, तो हम अपने फैसले पर फिर से विचार कर सकते हैं। लेकिन इस वक्त कोई यह नहीं बता सकता है कि अगले पांच-छह महीने में क्या होने वाला है।’
कंपनी के सीएफओ सुशांतो बनर्जी ने बताया कि, ‘कंपनी ने तो अपनी फिक्स्ड कॉस्ट को वेरियेबल कॉस्ट में बदलने की कवायद शुरू भी कर दी है। हम इसमें बुनियादी ढांचे से जुड़े फिक्स्ड कॉस्ट को भी शामिल करने के बारे में विचार कर रहे हैं। इसके लिए हम पे-पर-यूज आधार पर बुनियादी ढांचा लेने के बारे में सोच रहे हैं।’
कंपनी की 31 जनवरी को खत्म हुई तिमाही में कमाई 978 करोड़ रुपये के स्तर पर थी। साथ ही, इसके आम और प्रशासनिक खर्च करीब 67.3 करोड़ रुपये का था। यह 31 अक्टूबर को खत्म हुई तिमाही में इसके आम और प्रशासनिक खर्च  के स्तर से करीब 17 फीसदी ज्यादा है। दूसरी तरफ, कमाई के मुकाबले में कंपनी के यह खर्च सिर्फ 7 फीसदी बढ़े हैं।
पिछली तिमाही में ये खर्च 6.4 फीसदी बढ़े थे। बनर्जी ने बताया कि, ‘हमें इन्हीं में से कुछ लागतों की तरफ अपना ध्यान केद्रित कर रहे हैं, ताकि परिचालन में सुविधा हो।’ पिछली तिमाही में कंपनी ने 1,193 लोगों को नौकरी दी थी। इसमें से 574 कर्मी फ्रेशर हैं। इनमें से कई लोगों को इसके ट्रांजैक्शन आधारित कामों के लिए लिया गया था।
नए लोगों को लेने के बारे में अय्यर ने बताया कि, ‘हम कैंपसों से लोगों को इसलिए ले रहे हैं क्योंकि वे ऐसा निवेश है, जो हम भविष्य को ध्यान में रखकर कर रहे हैं। इसी आधार पर हम एक प्रतिस्पर्ध्दी कंपनी का निर्माण कर सकते हैं।’

First Published : March 6, 2009 | 1:07 PM IST