फ्यूचर रिटेल के ऋण पुनर्गठन पर जोर

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 4:33 AM IST

भारतीय बैंक संकटग्रस्त खुदरा कंपनी फ्यूचर रिटेल के ऋण का एक हिस्सा हिस्सेदारी में बदलने पर विचार कर रहे हैं। बैंक फ्यूचर रिटेल के किसी दूसरी प्रतिस्पद्र्धी कंपनी के हाथों बिकने से पहले कर्ज पुनर्गठन योजना के तहत यह कवायद निपटा लेना चाहते हैं। बैंक मध्य अगस्त तक कर्ज पुनर्गठन पर अंतिम निर्णय लेना चाहते हैं। बैंक इसलिए जल्दबाजी दिखा रहे हैं क्योंकि 31 अगस्त को ऋण भुगतान से छूूट की अवधि समाप्त होने के बाद कंपनी कर्ज लौटाने की स्थिति में नहीं रह जाएगी।
इस पूरे मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) ने फ्यूचर रिटेल के संभावित अधिग्रहण के लिए बैंकों से बातचीत शुरू कर दी है। फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) के प्रवर्तक बियाणी परिवार ने बैंकों के पास अपने शेयर गिरवी रख दिए हैं, इसलिए इन पर (शेयरों) पर किसी तरह का निर्णय लेने का अधिकार बैंकों के पास है।
सूत्र ने कहा, ‘आरआईएल एफआरएल का पूरा कर्ज अपने माथे नहीं लेना चाहती है, इसलिए अधिग्रहण से पहले कर्ज पुनर्गठन पर जोर दे रही है। इन हालात में बैंक आरआईएल के साथ किसी तरह का लेनदेन करने से पहले एफआरएल के कर्ज का कुछ हिस्सा शेयर में तब्दील करने की योजना पर काम कर रहे हैं।’ बैंक विमानन कंपनी, होटल और खुदरा सहित कोविड-19 की चपेट में खस्ताहाल होने वाली सभी कंपनियों के कर्ज का पुनर्गठन करना चाहते हैं। हालांकि वैश्विक महामारी से पहले ही एफआरएल की वित्तीय सहित बिगडऩे लगी थी। एक दूसरे सूत्र ने कहा कि फ्यूचर समूह अपने दो बीमा उद्यमों की बिक्री एसबीआई जनरल को करने के लिए बातचीत के अंतिम चरण में पहुंच गई है। समूह अपने ऊपर कर्ज बोझ हल्का करने के लिए यह सौदा करेगा। फ्यूचर समूह आरआईएल के साथ किसी भी सौदे का विरोध कर रहा है। एफआएल ने स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया है कि उसने अपने लिए किसी दूसरे पक्ष को बातचीत करने के लिए अधिकृत भी नहीं किया है। कंपनी ने साफ किया कि बैंकों के साथ बातचीत करने वाले किसी तीसरे पक्ष का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं होगा। हालांकि सूत्रों ने इसके उलट कहा कि बैंकों एवं फ्यूचर समूह और बैंकों एवं आरआईएल के बीच  चर्चाएं जोर-शोर से चल रही हैं। मामले पर नजर रखने वाले एक सूत्र ने कहा,’फ्यूचर समूह के प्रवर्तकों ने अपनी सभी शेयर बैंकों के पास गिरवी रख दिए हैं, इसलिए रिलायंस के साथ सौदे पर बैंक ही अंतिम निर्णय लेंगे।’
आरआईएल खुदरा स्टोर खंड में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहती है, इसलिए वह फ्यूचर रिटेल का अधिग्रहण करने में दिलचस्पी दिखा रही है। वित्त वर्ष 2019 में एफआरएल की बिक्री एवं मुनाफे का आंकड़ा क्रमश: 20,165 करोड़ और 733 करोड़ रुपये रहा था। दिसंबर तिमाही में कंपनी की बि क्री 5,129 करोड़ रुपये रही थी और उसे 180 करोड़ रुपये मुनाफा हुआ था। 31 मार्च को समाप्त हुई चौथी तिमाही के लिए कंपनी ने वित्तीय नतीजे घोषित नहीं किए हैं। केयर रेटिंग के अनुसार एफआरएल पर 29 फरवरी तक 7,241 करोड़ रुपये कर्ज था, जबकि 31 मार्च 2019 को कंपनी पर 2,657 करोड़ रुपये कर्ज था।
सूत्रों ने कहा कि आरआईएल अपने खुदरा कारोबार में वैश्विक साझीदार या निवेशक लाने से पहले एफआरएल के साथ सौदा निपटा लेना चाहती है। कंपनी उसके बाद अपना खुदरा कारोबार सूचीबद्ध कराना चाहती है। कुछ दिनों पहले संपन्न हुई आरआईएल के शेयरधारकों की सालाना आम बैठक में मुकेश अंबानी ने ऐसा संकेत दिए थे कि आने वाले समय में कंपनी के लिए खुदरा कारोबार अहम भूमिका निभाएंगे।

First Published : July 21, 2020 | 12:24 AM IST