देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ ने अपने कर्जों का भुगतान कर दिया है और ऐसे में कंपनी को कर्ज दताओं के दरवाजे जाकर अपने कर्ज का ढांचा बदलवाने की गुहार लगाने की जरूरत नहीं है।
हाल में भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को नकदी संकट का सामना कर रही रियल्टी फर्मों के कर्ज के ढांचे को बदलने के अपने नियमों में सख्ती कम की है। कुशल पाल सिंह की डीएलएफ का कहना है कि उसने 31 दिसंबर तक के अपने सभी कर्जों का भुगतान कर दिया है।
हालांकि कंपनी ने पुनर्भुगतान की रकम का खुलासा नहीं किया, लेकिन इडलवाइज की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार डीएलएफ पर मार्च, 2009 तक लगभग 2,000 करोड़ रुपये का बकाया था।
कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी रमेश सांका का कहना है, ‘हमें इस तारीख तक का अपना पूरा बकाया चुका दिया है। इसके अलावा, डीएलएफ ने पिछले 6 महीनों में किसी कर्ज का भुगतान आगे के लिए टाला नहीं था।’
कंपनी का यह वक्तव्य उस वक्त देखने को मिल रहा है, जिस वक्त रियल एस्टेट डेवलपर कर्ज के पुनर्भुगतान के मामले से परेशान नजर आ रहे हैं। इडलवाइज के अनुसार डीएलएफ का कुल कर्ज बकाया 30 सितंबर, 2008 तक 14,673 करोड़ रुपये था।
कंपनी अधिकारियों का कहना है कि वे कर्ज के पुनर्भुगतान की योजना में किसी तरह की कोई मुश्किल नहीं देख रहे। डीएलएफ का कर्ज का पुनर्भुगतान का वक्तव्य उस समय आया है, जब ठीक एक महीना पहले फिच ने कंपनी की साख कम कर दी थी।
फिच की रिपोर्ट के अनुसार रियल्टी उद्योग की प्रमुख कंपनी के पास 30 सितंबर, 2008 तक नकद और बैंक में कुल 1,332 करोड़ रुपये मौजूदा थे।
रिपोर्ट के अनुसार इस साल कंपनी के कई कर्जों की मियाद पूरी हो जाएगी और दूसरी छमाही में उसे 3,200 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा, जिसकी वजह से कर्ज बाजार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
फिच को अगले साल तक आवासीय परियोजनाओं में दिक्कतें बनी रहने की आशंका है, जिसकी वजह से डीएलएफ के मार्जिन, कर्ज लेखा-जोखा और नकदी प्रवाह पर दबाव बनेगा।
कंपनी ने अपनी परियोजनाओं के डिजाइन में लगने वाली अवधि को कम करने, मांग को देखते हुए परियोजनाओं के परिचालन को प्राथमिकता देने और गैर-जरूरी खर्च को कम कर कार्य कुशलता को बढ़ाने जैसी अपनी योजनाओं की घोषणा की थी।