आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने सत्यम कंप्यूटर के संस्थापक बी. रामलिंग राजू और उनके परिवार द्वारा प्रवर्तित कंपनी मायटास इन्फ्रा को 120 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना का ठेका दिए जाने पर रोक लगा दी है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश दवे और न्यायाधीश रमेश रंगनाथन की पीठ ने कड्डपा जिले के नारायण रेड्डी की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए यह स्थगन आदेश दिया।
मजेदार बात यह कि ठीक उसी वक्त राज्य के मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल मेटास को सड़क निर्माण का यह ठेका देने के प्रस्ताव की पुष्टि कर रहा था।
सूचना मंत्री ए. रामनारायण रेड्डी और ऊर्जा मंत्री मोहम्मद अली शब्बीर ने मंत्रिमंडल के फैसले की घोषणा की। जब यह कहा गया कि उच्च न्यायालय ने तो इस परियोजना पर पाबंदी लगा दी है। इस पर दोनों मंत्रियों ने कहा कि राज्य सरकार न्यायालय के आदेश का पालन करेगी।
उल्लेखनीय है कि प्रमुख विपक्षी दलों-तेदेपा टीआरएस भाकपा और माकपा ने आरोप लगाया है कि सरकार ने मेटास को सड़क परियोजना आवंटित करते हुए नियमों में ढील दी है।
साथ इन दलों ने मायटास को ऐसे वक्त पर अवांछित फायदा देने लिए मुख्यमंत्री की आलोचना की, जबकि सत्यम कंप्यूटर देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट घोटाले में फंसी हुई है।
राज्य के मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी ने हालांकि इस आरोप का खंडन किया और कहा कि संबंधित सड़क निर्माण के मामले में युध्द स्तर पर काम किया जाना था।