बदलेंगे कॉस्ट ऑडिटिंग नियम

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 10:00 PM IST

सरकार कॉस्ट ऑडिटिंग की मौजूदा पद्धति बदलने जा रही है। अब तक लागू प्रावधान के मुताबिक, यह सरकार ही तय करती है कि किस-किस कंपनी की कॉस्ट ऑडिटिंग होगी और किसकी नहीं।
हाल में इस बारे में एक स्पष्ट नीति की जरूरत महसूस की जाने लगी है। कंपनी मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि लागू नियमों के मुताबिक ज्यादातर सरकारी कंपनियों की ही कॉस्ट ऑडिटिंग होती है। वहीं ज्यादातर निजी कंपनियां इस दायरे से बाहर ही रहती हैं।
उदाहरण के लिए पेट्रोलियम क्षेत्र को लें। यहां केवल सार्वजनिक कंपनियां ही इस दायरे में आते हैं, जबकि सभी निजी पेट्रोलियम कंपनियां अभी कॉस्ट ऑडिटिंग नहीं करवातीं।
सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय तेल निगम (आईओसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ”कॉस्ट ऑडिटिंग के दायरे से निजी कंपनियों को अब तक दूर रखा जाता रहा है। इस मामले पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कोई स्पष्ट नजरिया है। हमारे लिए तो मौजूदा प्रावधान पूरी तरह अतार्किक है।”
वहीं कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कहा कि इसकी कोई खास वजह नहीं है। 2007 के शुरू में यह आदेश पारित किया था। अधिकारी ने इस बारे में अनभिज्ञता जाहिर की कि ऐसा हो कैसे रहा है। पेट्रोलियम सचिव आर. एस. पांडेय ने बताया, ”सार्वजनिक तेल कंपनियों को घाटे पर ईंधन बेचने के लिए क्षतिपूर्ति दी जाती है। इसलिए जरूरी है कि उत्पादों की लागत पता की जाए। निजी कंपनियों के मामले में ऐसा नहीं होता।”
ऐसा नहीं कि ये मामले केवल पेट्रोलियम उद्योग में ही पाए जा रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र में भी ऐसा ही हो रहा है। गैर-पारंपरिक तरीके से ऊर्जा उत्पादन में जुटी कंपनियां, कैप्टिव पावर प्लांट, मिनी-हाइड्रो प्लांट भी इस दायरे में नहीं आतीं।
वास्तव में कई ऐसे उद्योग हैं जहां कॉस्ट ऑडिटिंग के कोई आदेश अब तक जारी नहीं हुए हैं। इनमें दूरसंचार और धातु और खनन उद्योग प्रमुख हैं। अब तक देश में जो 9 लाख कंपनियां पंजीकृत हैं, उनमें से करीब 50 हजार कंपनियां 44 कॉस्ट एकाउंटिंग रिकॉड रूल्स (सीएआरआर) के तहत आती हैं। लेकिन धारा 233 बी के तहत 4 फीसदी यानी 2000 से भी कम कंपनियां कॉस्ट ऑडिटिंग के दायरे में आती हैं।
दूसरे उद्योगों में कॉस्ट ऑडिटिंग के बहुत ही कम आदेश दिए गए हैं। यह तब है जब सीएआरआर के तहत कई कंपनियों की कॉस्ट ऑडिटिंग हो सकती है। उदाहरण के लिए, इस्पात उद्योग की ज्यादातर प्राथमिक और द्वितीयक इस्पात उत्पादक इकाइयां कॉस्ट ऑडिटिंग के दायरे से बाहर हैं।
मौजूदा स्थिति में बदलाव हो सकता है यदि सरकार आठ सदस्यीय विशेषज्ञ समूह की सिफारिशें मंजूर कर लेती है। इस समूह को 2008 में कंपनी मामलों के मंत्रालय ने मौजूदा कॉस्ट ऑडिटिंग रिकॉड रूल्स, कॉस्ट ऑडिट रिपोर्ट रूल्स और कॉस्ट एकाउंटिंग स्टैंडर्ड में संशोधन के लिए गठित किया था।
देश में 9 लाख कंपनियां हैं पंजीकृत
पंजीकृत कंपनियों में से महज 50 हजार ही आती हैं सीएआरआर के तहत
लेकिन कॉस्ट ऑडिटिंग के दायरे में हैं 2000 से भी कम कंपनियां
पिछले साल हुआ था समीक्षा समूह का गठन

First Published : March 29, 2009 | 9:52 PM IST