कोयला कर्मचारी भी चाहें फ्रंटलाइन दर्जा व कोरोना का टीका

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 3:47 AM IST

अप्रैल में धनबाद कोलियरी कर्मचारी संघ के एक कर्मचारी एस श्रीवास्ताव ने भारत कोकिंग कोल (बीसीसीएल) को पत्र लिखकर खदान कामगारों को अग्रिम पंक्ति का कर्मचारी घोषित करने और उनका टीकाकरण तुरंत शुरू करने की मांग की थी।        
कोयला खनिक एक दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं और उनके माध्यम से कोविड के प्रसार का जोखिम ज्यादा है।
अप्रैल के अंत में कोल इंडिया (सीआईएल) की पैतृक कंपनी बीसीसीएल ने अपने कर्मचारियों का टीकाकरण शुरू किया, लेकिन काफी लोग टीका लगने से रह गए। टीकाकरण में पहले ही काफी देर हो चुकी थी। सीआईएल ने कहा 1 अप्रैल से 27 मई, 2021 के बीच कोविड से होने वाली मौतों की संख्या 360 थी। खदान वाले राज्यों में कर्मचारियों और कर्मचारी संघों ने मौत का आंकड़ा 500 कर्मचारियों के आसपास बताया है जिनमें ठेका कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं।
भले ही आंकड़ों में अंतर है, देश के दूर दराज के इलाकों में खदान श्रमिकों को हर रोज कोविड संबंधी जोखिम झेलना पड़ रहा है। धनबाद कोलियरी में मैकेनिक का काम करने वाले रवि सिंह ने कहा, ‘कोयला खनन एक आवश्यक कार्य है लेकिन इस कार्य में लगे कर्मचारियों को अग्रिम पंक्ति का नहीं माना गया। यदि एक कर्मचारी आज बीमार हो भी जाता है तो उसके साथ काम करने वाले नौ कर्मचारी अगले दिन काम पर जाते हैं।’ ये कर्मचारी खुद से एकांतवास में नहीं जा सकते क्योंकि खदान में काम चल रहा होता है।
सीआईएल के पास एक व्यापक चिकित्सा नेटवर्क है लेकिन कोविड की दूसरी लहर के दौरान इस पर दबाव बढ़ गया था। कई कर्मचारियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड के सुदूर इलाकों के खदानों के समीप स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में केवल आधारभूत चिकित्सा ढांचा और कर्मचारी होते हैं।
सिंह बीसीसीएल में काम करते हैं जिसके पास अपने 43,000 कर्मचारियों के लिए एक केंद्रीय अस्पताल, 13 क्षेत्रीय अस्पताल और 73 औषाधालय हैं। जिला प्रशासकों ने कोविड के मामले बढ़ते ही मार्च 2021 से सीआईल अस्पतालों की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि कोयला कर्मचारियों को अपनी ही कंपनी के अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की किल्लत होने लगी।
श्रीवास्तव ने कहा, ‘प्रत्येक तीन से चार औषधालयों के लिए एक डॉक्टर है। जांच, भर्ती और यहां तक कि दवा उपलब्धता में भी देरी होती है। प्रत्येक तीन कोलियरी पर एक एंबुलेंस थी और मामलों के चरम पर होने के दौरान उन एंबुलेंसों में ऑक्सीजन की सुविधा नदारद थी।’ बीसीसीएल के खनन क्षेत्र में झारखंड और पश्चिम बंगाल में क्रमश: झरिया और रानीगंज शामिल है।       
सिंह मई में कोविड पॉजिटिव हो गए थे और सीआईएल के अस्पताल में भर्ती हुए थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में प्रमुख सेवाएं तो उपलब्ध थी लेकिन स्टाफ की कमी थी और आईसीयू में भर्ती पूरी तरह से रेफरेंस के आधार पर ही होता था।
सिंह ने कहा, ‘मुझे कोविड वार्ड में भर्ती भी नहीं किया गया था। उपचार में काफी देर हुई थी। आईसीयू में सीआईएल का कोई व्यक्ति नहीं था जिसके कारण हमें कठिनाई से गुजरना पड़ा। एक सीटी स्कैन कराने के लिए भी मुझे दूसरे अस्पताल जाना पड़ा था।’
ठीक होने के करीब 20 दिन बाद जब सिंह खदान में काम पर लौटे तो उन्हें अपने साथ भर्ती हुए दो साथी कर्मचारी की मृत्यु का समाचार मिला। सिंह ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘जब तक हम खदान में होते हैं तभी तक के लिए कंपनी के कर्मचारी होते हैं, उसके बाद नहीं।’

First Published : June 10, 2021 | 11:48 PM IST