मौजूदा ऋण संकट का साया शहरों में गैस वितरण अधिकार हासिल करने के लिए बोली प्रक्रिया में शामिल होने वाली कंपनियों के उत्साह को ठंडा कर सकता है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड अगले महीने 7 शहरों के लिए बोली के पहले चरण को अंजाम देगा।
बोर्ड के सदस्य बीएस नेगी ने कहा, ‘हमने बोली प्रक्रिया में कंपनियों द्वारा बढ़-चढ़कर भाग लिए जाने का अंदाजा लगाया था, लेकिन अब हमें वैसी प्रतिक्रिया हासिल होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। हमारा मानना है कि मौजूदा वित्तीय संकट की वजह से बोली प्रक्रिया की आक्रामकता गायब हो सकती है। इसमें तकरीबन 6 बोलीदाता भाग ले सकते हैं।’
पहले चरण में बोर्ड काकीनाडा, मथुरा, भोपाल, सोनीपत, गाजियाबाद, सहदोल और कोटा के लिए बोली प्रक्रिया आयोजित करेगा। भारत की सबसे बड़ी गैस विक्रेता गेल इंडिया की सहयोगी कंपनी गेल गैस, गुजरात गैस, ग्रेट ईस्टर्न एनर्जी कंपनी और रिलायंस इंडस्ट्रीज इन शहरों के लिए एक्सप्रेसंस ऑफ इंटरेस्ट पहले ही भेज चुकी हैं।
हर शहर में पाइपलाइन और मार्केटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए औसतन 400 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। 7 बोलियां लगभग 2800 करोड़ रुपये के निवेश से संबद्ध हैं। बोर्ड ने कहा था कि पूरे देश के शहरों में गैस नेटवर्क स्थापित करने के लिए 40,000 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी।
कुछ नई कंपनियां ही इस क्षेत्र में दस्तक दे सकती हैं। मुंबई में घरों और वाहनों को गैस की आपूर्ति करने वाली कंपनी ‘महानगर गैस’ के प्रबंध निदेशक पीके गुप्ता ने कहा, ‘कंपनियों को इसमें बड़ा निवेश करना होगा। शहरों में गैस वितरण के लिए दक्षता की जरूरत होती है।’