बीपीसीएल कर्मी वेतन नियमों को लेकर चिंतित

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 2:11 AM IST

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के कर्मचारी कंपनी प्रबंधन द्वारा प्रस्तावित दीर्घावधि समाधान प्रस्तावों को लेकर चिंतित हैं। कर्मचारी संगठन के नेताओं का कहना है कि प्रस्तावित दीर्घावधि वेतन समझौता में 3 साल में वेतन में बदलाव का प्रस्ताव विवाद का विषय है।
बीपीसीएल कर्मचारी संगठन के एक प्रतिनिधि ने कहा, ‘अब बीपीसीएल का निजीकरण निश्चित नजर आ रहा है, ऐसे में नए प्रवर्तक को लेकर (वह जो भी हो) भी चिंता है कि वह जल्द ही कम वेतन की ओर बढ़ेगा। प्रबंधन द्वारा प्रस्तावित दीर्घावधि वेतन समझौते में 3 साल पर वेतन की समीक्षा का प्रस्ताव किया गया है। यह पहले के दीर्घावधि वेतन समझौते के 10 साल पर समीक्षा से इतर है।’ निजीकरण पर जोर दिए जाने के पहले कर्मचारियों ने वेतन में स्थिरता के डर से 10 साल पर वेतन समीक्षा का विरोध किया था। लेकिन बीपीसीएल के नए प्रवर्तक होने की संभावना के बीच कर्मचारियों ने अपना रुख बदल लिया है और वे वेतन के अपने मौजूदा स्तर को बरकरार रखना चाहते हैं।
बीपीसीएल में हिस्सेदारी बेचने के केंद्र के फैसले पर वेदांता, अपोलो ग्लोबल और आई स्क्वारेड कैपिटल ने प्रतिक्रिया दी है। भारत की तेल शोधन क्षमता के 15 प्रतिशत पर इस सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) का कब्जा है और वाहन ईंधन विपणन में इसकी 23 प्रतिशत हिस्सेदारी है। राजकोषीय घाटे के  अंतर कम करने की सरकार की कवायद के तहत यह विनिवेश किया जा रहा है। प्रतिनिधि ने कहा, ‘निजीकरण का विरोध कर रहे लोगों पर केंद्र सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में बीपीसीएल के कर्मचारी अब उचित वेतन समझौते पर ध्यान दे रहे हैं, जैसा भारत एल्युमीनियम कंपनी (बालको) के निजीकरण के समय किया गया था।’
वेदांत समूह की स्टरलाइट इंडस्ट्रीज ने मार्च 2001 में बालको में 51 प्रतिशत हिस्सा लिया था। यह विवादास्पद विनिवेश राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के पहले कार्यकाल में किया गया था।  इसके पहले बीपीसीएल के कर्मचारियों की आल इंडिया कोआर्डिनेशन कमेटी ने ज्ञापन में कहा था कि मुंबई रिफाइनरी में कर्मचारियों का वेतन समझौता 31 दिसंबर, 2016 को खत्म हो गया। कोच्चि रिफाइनरी का कर्मचारियों का समझौता 31 जुलाई, 2018 को खत्म हो गया। मार्केटिंग डिवीजन के कर्मचारियों के साथ समझौता 31 मई, 2018 को खत्म हो गया था। कर्मचारी संगठनों ने वेतन समजौते के नवीकरण पर जोर दिया है।
केवल यही बीपीसीएल के कर्मचारियों की समस्या नहीं है। इस मामले से जुड़े कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक ‘मार्केटिंग डिवीजन के करीब 95 प्रतिशत कर्मचारियों की प्रस्तावित वेतन समझौते में कोई अहर्ता नहीं है और उन्होंने खाली लाइनों पर हस्ताक्षर किए हैं।’ एसोसिएशन के प्रतिनिधि ने कहा, ‘मार्केटिंग डिवीजन में ज्यादातर कर्मचारियों का कम कार्यकाल बचा है, जिससे यह विचलन समझा जा सकता है। मार्केटिंग डिवीजन में करीब 2000 कर्मचारी हैं और इतने ही कर्मचारी रिफाइनरी डिवीजन में हैं।’

First Published : January 4, 2021 | 11:16 PM IST