केंद्रीय मंत्रिमंडल शीघ्र भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को उसके निजीकरण के बाद के कुछ आरंभिक वर्षों के लिए कुछ विशिष्ट पेट्रोलियम उत्पादों पर सब्सिडी लेने की अनुमति प्रदान कर सकता है ताकि उसमें निरंतरता सुनिश्चित की जा सके।
इस कदम से सरकार को बीपीसीएल के निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी क्योंकि इससे संभावित बोलीदाताओं को चीजें स्पष्ट होंगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि जैसे ही निवेश और संपत्ति प्रबंधन विभाग तेल विपणन कंपनी की बिक्री के प्रस्ताव के लिए अनुरोध को तैयार करेगा सरकार को चयनित बोलीदाताओं को सब्सिडी के मुद्दे पर स्पष्टता देनी होगी।
अधिकारी ने कहा कि तेल मंत्रालय ने कुछ वर्षों के लिए बीपीसीएल को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) पर मौजूदा व्यवस्था के अनुरूप सब्सिडी देने का निर्णय किया है और इसके लिए मंत्रिमंडल का एक नोट तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल शीघ्र ही इस पर विचार करेगी।
इस महीने वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोक सभा में एक प्रश्न के जवाब में कहा था कि बीपीसीएल के निजीकरण के लिए वित्त बोली मंगाने से पहले सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के इस उपक्रम (पीएसयू) के विनिवेश के बाद कुछ विशिष्ट पेट्रोलियम उत्पादों के लिए सब्सिडी युक्त दरों को जारी करने पर निर्णय लेगी।
पीएसयू तेल विपणन कंपनियों के ऐसे एलपीजी ग्राहक जिनकी सालाना आय 10 लाख रुपये से कम है उन्हें उनके बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिये सब्सिडी की रकम भेजी जाती है। इसके अलावा, ये कंपनियां सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को भी लागू करती हैं जिसके तहत गरीब परिवारों को मुफ्त में एलपीजी कनेक्शन दिया गया है। निजी कंपनियों के ग्राहकों को ये दोनों प्रकार की सब्सिडी नहीं दी जाती है। फिलहाल, हालांकि, सिलिंडरों की सब्सिडी शून्य है क्योंकि तेल विपणन कंपनियां घरेलू एलपीजी सिलिंडरों के दाम में वृद्घि कर उसे वैश्विक दरों के समान स्तर पर ला रही हैं।
हाल की एक टिप्पणी में फिच रेटिंग्स ने कहा था कि विनिवेश किए जाने से पहले बीपीसीएल के ग्राहकों को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस और किरोसिन की बिक्री पर दी जा रही सब्सिडी के भविष्य पर और अधिक स्पष्टता लाने की जरूरत है। साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमत को लेकर दी जाने वाले स्वतंत्रता को भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
अधिकारी ने कहा कि हालांकि, चूंकि पेट्रोल और डीजल की कीमत नियंत्रण मुक्त है ऐसे में नए खरीदार को उसे तय करने की स्वतंत्रता होगी और सरकार शायद ही उसमें हस्तक्षेप करेगी।
फिच रेटिंग्स ने अपनी हालिया टिप्पणी में कहा, ‘सरकार ने अपने सामाजिक-आर्थिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए बीपीसीएल सहित तेल विपणन कंपनियों का परंपरागत रूप से इस्तेमाल किया है लेकिन हो सकता है कि निजी कंपनियां पर इस तरह के नियामकीय जोखिम के प्रति उतना अधिक झुकाव नहीं रखे।’