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Rupee vs Dollar: 12 साल की सबसे बड़ी छलांग, रुपया 1.8% मजबूत

ईरान संघर्ष के कारण पैदा हुई चिंताओं के बीच रुपया चालू कैलेंडर वर्ष में डॉलर के मुकाबले 3.48 फीसदी कमजोर हुआ है

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- April 03, 2026 | 12:05 AM IST

रुपये ने आज जबरदस्त वापसी करते हुए पिछले 12 साल में अपनी सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त दर्ज की। यह उछाल ऐसे समय में आई जब भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के बावजूद रुपये में भारी गिरावट को रोकने के लिए पिछले सप्ताह सट्टा गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए उपाय किए थे।

दिन के कारोबार के दौरान रुपया 92.83 से 93.66 प्रति डॉलर के दायरे में रहा। आयातकों, निर्यातकों और बैंकों द्वारा सक्रिय तौर पर हेजिंग किए जाने से रुपये में आज भी उतार-चढ़ाव बरकरार रहा।मगर रुपया आज पिछले कारोबारी सत्र के अपने 95.21 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर से जबरदस्त वापसी करते हुए एक समय 92.83 प्रति डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया। दो दिनों के अवकाश के बाद गुरुवार को विदेशी मुद्रा बाजार खुलने पर यह स्थिति देखी गई।

दिन भर के कारोबार के बाद रुपया आखिरकार 93.10 प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 1.8 फीसदी बढ़त है। साथ ही यह सितंबर 2013 के बाद की सबसे बड़ी बढ़त है जब रुपये में 2.61 फीसदी की मजबूती दिखी थी।  ईरान संघर्ष के कारण पैदा हुई चिंताओं के बीच रुपया चालू कैलेंडर वर्ष में डॉलर के मुकाबले 3.48 फीसदी कमजोर हुआ है।

शुक्रवार को बैंकों की घरेलू मुद्रा पोजीशन को 10 करोड़ डॉलर तक सीमित किए जाने के बाद रिजर्व बैंक ने बुधवार को तत्काल प्रभाव से बैंकों को निवासी या अनिवासी उपयोगकर्ताओं के लिए रुपये से संबंधित कुछ बिना डिलिवरी वाले अनुबंधों की पेशकश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी।

बैंक अभी भी हेजिंग के लिए डिलिवरी वाले विदेशी मुद्रा अनुबंधों की पेशकश कर सकते हैं। मगर उपयोगकर्ता उन अनुबंधों को विदेश में लिए गए पोजीशन के साथ समायोजित नहीं कर सकते। बैंक फॉर इंटरनैशनल सेटलमेंट्स (बीआईए) के आंकड़ों का हवाला देते हुए ब्लूमबर्ग ने बताया कि 2025 में सिंगापुर, ब्रिटेन, अमेरिका और हॉन्ग कॉन्ग में रुपये में औसत दैनिक विदेशी व्यापार लगभग 149 अरब डॉलर का था जो 72 अरब डॉलर के घरेलू व्यापार के मुकाबले दोगुना से भी अधिक है।

बाज़ार के जानकारों ने बताया कि गुरुवार को बैंकों ने नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) बाजार में अपनी लॉन्ग पोजिशन तेजी से कम कर दीं और घरेलू बाजार में डॉलर की खरीदारी की। इससे हेजिंग की मांग वापस देसी बाजार में आ गई। ऐसे में फॉरवर्ड अनुबंध के जरिये डॉलर की दरें तय करने की लागत बढ़ गई। इस प्रकार एक महीने का फॉरवर्ड प्रीमियम 3.73 फीसदी से बढ़कर 5.4 फीसदी हो गया। चार महीने तक के अनुबंध के प्रीमियम में 1 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई और वे लगभग 4.25 फीसदी तक पहुंच गए।

First Published : April 3, 2026 | 12:05 AM IST