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रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया: ₹96.14 तक लुढ़का, क्या ₹100 प्रति डॉलर तक गिर जाएगा?

डॉलर में मजबूती, कच्चे तेल के ऊंचे दामों और ₹28.4 अरब के व्यापार घाटे के कारण रुपया ₹96.14 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- May 15, 2026 | 11:23 PM IST

डॉलर में मजबूती, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भारत के बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर चिंता से रुपये में गिरावट का सिलसिला आज भी बना रहा और कारोबार के दौरान यह 96.14 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक लुढ़क गया। बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर यील्ड भी 4 आधार अंक बढ़कर 7.06 फीसदी पर बंद हुई।

डीलरों ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दखल के बाद रुपये ने अपने नुकसान की कुछ भरपाई की और कारोबार की समा​प्ति पर यह 95.97 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। गुरुवार को यह 95.77 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

डॉलर इंडेक्स गुरुवार के 98.51 के मुकाबले बढ़कर 99.30 पर पहुंच गया जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा। डॉलर सूचकांक 6 प्रमुख मुद्राओं के बास्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है।

बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 109 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। अप्रैल में भारत का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 28.4 अरब डॉलर रहा जो मार्च में 20.7 अरब डॉलर था। इससे देश की बाह्य आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ गई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए, बार्कलेज ने चालू खाता घाटे के अपने अनुमान को संशोधित कर जीडीपी  का 1.8 फीसदी कर दिया है, और वित्त वर्ष 2027 के लिए भुगतान संतुलन घाटे का अनुमान 50 अरब डॉलर होने का लगाया है।

एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, ‘बाजार से लगातार निकासी हो रही है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर इंडेक्स भी ऊपर जा रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘आरबीआई ने दखल दिया जिससे रुपये को 96 प्रति डॉलर से नीचे स्थिर होने में मदद मिली।’ इस साल रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई है और डॉलर के मुकाबले अभी तक इसमें 6.35 फीसदी की गिरावट आई है। अप्रैल से अब तक रुपया 1.21 फीसदी कमजोर हुआ है। 

एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशकों ने घरेलू इक्विटी में 2 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की है, जबकि इसी अवधि के दौरान उन्होंने डेट में 924 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की है। भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि रुपया 2 रुपये कमजोर होता है तो ईंंधन की कीमतों में 3 रुपये की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को होने वाला लाभ समाप्त हो जाएगा यानी इस बढ़त का कोई फायदा नहीं होगा। 

बाजार के जानकारों का कहना है कि आरबीआई मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए सरकारी बैंकों के जरिये डॉलर की बिकवाली करके बीच-बीच में दखल दे रहा है। हालांकि तेल की कीमतों में तेजी और आयातकों की ओर से डॉलर की लगातार मांग के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। नियामक या सरकार की तरफ से किए गए नीतिगत उपाय रुपये को कुछ समय के लिए सहारा दे सकते हैं लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि निकट भविष्य में रुपया 100 प्रति डॉलर के स्तर को छू सकता है।

एक निजी बैंक के एक ट्रेजरी प्रमुख ने कहा, ‘नियामक या सरकार की तरफ से कोई भी दखल रुपये को कुछ समय के लिए सहारा दे सकता है और मुद्रा 96 से 96.25 प्रति डॉलर के स्तर के आस-पास स्थिर हो सकती है। लेकिन रुपये के 100 प्रति डॉलर तक पहुंचने के जोखिम को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता लेकिन ऐसा कब तक होगा यह कहा नहीं जा सकता।’

तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें बढ़ाने से बॉन्ड यील्ड और भी बढ़ सकती है जिससे महंगाई पर दबाव पड़ेगा।

उक्त शख्स ने कहा, ‘महंगाई के जोखिम और संभावित राजकोषीय असर को देखते हुए अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 7.25 फीसदी तक पहुंच सकती है। हालांकि 6.85 फीसदी इसका निचला स्तर हो सकता है।’

बॉन्ड बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि साप्ताहिक सरकारी बॉन्ड नीलामी में यील्ड उम्मीद से अधिक रही जिससे बेंचमार्क यील्ड और ऊपर चली गई।

First Published : May 15, 2026 | 11:15 PM IST