कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को भी नरमी बनी हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन सऊदी अरब की तरफ से अतिरिक्त तेल सप्लाई की खबरों ने बाजार की चिंता कुछ कम कर दी है। इसी वजह से ब्रेंट और WTI दोनों पर दबाव दिख रहा है।
ताजा भाव के मुताबिक WTI क्रूड करीब 102.29 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड करीब 105.71 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। इससे पहले बुधवार को भी दोनों बेंचमार्क में करीब 3 डॉलर की गिरावट आई थी। Reuters के मुताबिक शुरुआती कारोबार में गुरुवार को WTI करीब 1.1 फीसदी और ब्रेंट करीब 1.2 फीसदी नीचे था।
कच्चे तेल में गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?
सबसे अहम वजह सऊदी अरब की ओर से अतिरिक्त क्रूड सप्लाई की व्यवस्था है। सऊदी अरब ओमान के सोहार पोर्ट के पास जहाज से जहाज में तेल ट्रांसफर के जरिए एशियाई रिफाइनरियों को ज्यादा कार्गो उपलब्ध करा रहा है। इससे यह डर कुछ कम हुआ है कि सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमलों के कारण वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बहुत ज्यादा घट सकती है।
इसके अलावा बाजार को उम्मीद है कि सऊदी अरब अपनी प्रभावित ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की करीब आधी क्षमता कुछ दिनों में बहाल कर सकता है और पूरी क्षमता अगले कुछ हफ्तों में लौट सकती है। अगर ऐसा होता है तो रेड सी की तरफ तेल भेजने की क्षमता फिर बढ़ेगी और सप्लाई पर दबाव घट सकता है।
अमेरिका के तेल भंडार ने भी बढ़ाया दबाव
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी EIA के आंकड़ों ने भी तेल की कीमतों को सहारा नहीं दिया। अमेरिका के कच्चे तेल के भंडार में करीब 6.4 लाख बैरल की कमी आई, जबकि बाजार को इससे ज्यादा गिरावट की उम्मीद थी। यानी मांग के मुकाबले भंडार उतना तेजी से नहीं घटा, जितनी उम्मीद थी। इससे भी तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा।
फेड के फैसले का भी असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। इसके बाद डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती दिखी। आम तौर पर मजबूत डॉलर से डॉलर में खरीदे जाने वाले कच्चे तेल जैसी कमोडिटी दूसरे देशों के खरीदारों के लिए महंगी हो जाती है। इससे मांग पर दबाव पड़ सकता है और कीमतें कमजोर हो सकती हैं।
फिर भी पश्चिम एशिया का जोखिम खत्म नहीं
हालांकि कच्चे तेल में फिलहाल गिरावट है, लेकिन पश्चिम एशिया में सप्लाई से जुड़ा जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सऊदी अरब की पाइपलाइन पर हमले, लाल सागर के रास्तों में दिक्कत और होर्मुज से तेल की आवाजाही को लेकर चिंता अभी बनी हुई है। इसलिए बाजार में किसी नई बाधा या तनाव बढ़ने पर कीमतों में दोबारा तेज उछाल आ सकता है।
