देश के स्मार्टफोन बाजार में रीफर्बिश्ड फोन की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए कि वैश्विक अनिश्चितता की वजह से प्रतिकूल व्यापक आर्थिक हालात के बीच नए फोनों की कीमतें बढ़ रही हैं और खर्च के प्रति उपभोक्ता सतर्क रुख अपना रहे हैं। इसके शुरुआती संकेत पहले से ही दिखाई देने लगे हैं।
काउंटरपॉइंट रिसर्च ने मंगलवार को कहा कि देश में स्मार्टफोन की बिक्री इस साल के पहले नौ हफ्तों में 9 प्रतिशत घट गई, क्योंकि पिछले चार से पांच महीने के दौरान मेमरी की लागत चार गुना हो गई है। इससे फोन की कीमतें 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। कुछ मॉडल तो 30 प्रतिशत तक महंगे हुए हैं।
काउंटरपॉइंट में अनुसंधान निदेशक तरुण पाठक ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि साल 2026 में डीलरों को भेजी जाने वाली कुल खेपों में साल 2025 की तुलना में 10 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है और इसके 13.9 करोड़ रहने का अनुमान है। साल 2025 में वर्ष 2024 की तुलना में खेपों में कोई खास अंतर नहीं आया था।
पाठक ने कहा, ‘रुपये में कमजोरी और पश्चिम एशिया में संघर्ष से व्यापक आर्थिक दिकक्तें खड़ी हो रही हैं। अगर यह एक महीना या उससे अधिक तक जारी रहा तो अनुमानों में और कटौती हो सकती है, क्योंकि मार्च से उपभोक्ताओं की खरीद का मनोबल कमजोर होने लगा है।’ उन्होंने कहा कि अधिकांश ब्रांडों ने हाल के हफ्तों में कीमतों में वृद्धि का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला है।
उन्होंने कहा, ‘हम सुन रहे हैं कि दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) अधिकांश ब्रांडों के लिए बहुत कठिन अवधि होगी और निकट भविष्य में सुधार के कोई संकेत नहीं हैं। शायद चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) या उसके बाद ही ऐसा हो, क्योंकि मेमरी की कमी कम से कम डेढ़ साल तक बनी रहने की आशंका है।’
आईडीसी इंडिया में एसोसिएट उपाध्यक्ष नवकेंद्र सिंह ने कहा, ‘डीलरों को भेजी जाने वाली स्मार्टफोन की खेप में तेज गिरावट शायद वैश्विक महामारी के बाद दूसरी ऐसी घटना हो सकती है, जब अधिक इनपुट लागत के शुरुआती झटके को वैश्विक पर महसूस किया गया था।’ उन्होंने कहा कि ब्रांड इस बात पर विचार कर रहे हैं कि मॉडल लाने में देरी की जाए या कम स्पेसिफिकेशन्स वाले फोन पेश करें।