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AI Impact Summit: भारत ने दिखाई अपनी AI संप्रभुता, लॉन्च हुए 4 स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल

विवेक राघवन और प्रत्यूष कुमार द्वारा स्थापित घरेलू स्टार्टअप सर्वम एआई ने भारतीय भाषाओं के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित दो स्वदेशी मॉडल पेश किए

Published by
अविक दास   
आशीष आर्यन   
Last Updated- February 22, 2026 | 10:27 PM IST

नई दिल्ली में आयोजित हुए ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के शुरुआती दिनों में प्रशासनिक अड़चनें और कुछ बाधाएं जरूर देखने को मिलीं लेकिन पांच दिनों के इस सम्मेलन से जो व्यापक संदेश निकला, वह बिल्कुल स्पष्ट था- अगर एआई का लाभ सभी लोगों तक पहुंचाना है तो इसके प्रसार की गति तेज करनी होगी। 

भारत ने इस मंच का उपयोग अपनी ‘एआई संप्रभुता’ की महत्त्वाकांक्षा प्रदर्शित करने के लिए किया। सरकार के 10,372 करोड़ रुपये के इंडिया एआई मिशन के तहत चार स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) लॉन्च किए गए। इससे संकेत मिला कि देश स्थानीय संदर्भों को ध्यान में रखते हुए और कम लागत में आधारभूत एआई ढांचा तैयार कर रहा है।

विवेक राघवन और प्रत्यूष कुमार द्वारा स्थापित घरेलू स्टार्टअप सर्वम एआई ने भारतीय भाषाओं के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित दो स्वदेशी मॉडल पेश किए। इन मॉडलों को लॉन्च किए जाने पर अल्फाबेट और गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई की तारीफ भी मिली। उन्होंने कहा, ‘सर्वम ने स्थानीय एआई मॉडल को तैयार किया है जिसमें मुझे कोई बाधा नहीं दिखती और यह बेहद अच्छी स्थिति में है।’

वहीं दूसरे स्टार्टअप में ज्ञानीडॉटएआई ने ‘वचना टीटीएस’ नाम के टेक्स्ट-टू-स्पीच प्रणाली यानी लिखे शब्दों को बोलकर सुनाने वाला एआई लॉन्च किया जो आवाज की नकल कर सकता है और 12 भारतीय भाषाओं में काम करने में सक्षम है। वहीं, आईआईटी मुंबई के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ‘भारतजेन’ ने 17 अरब मानक वाला बहुभाषी आधारभूत मॉडल पेश किया।

कुछ छोटी स्टार्टअप पर भी लोगों का ध्यान गया जो एआई के माध्यम से वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर बिगओहेल्थ के संस्थापक ने कैंसर मरीजों के परिवारों की मदद के लिए बीमारी की पहचान के आधार पर अगले कदमों की स्पष्ट जानकारी देने वाला मंच तैयार किया है। हालांकि व्यावसायिक सफलता आखिरकार प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

फिर भी, यह बदलाव स्पष्ट है क्योंकि 2023 में सैम ऑल्टमैन ने स्टार्टअप द्वारा ओपनएआई से प्रतिस्पर्धा करने के प्रयासों को ‘काफी निराशाजनक’ बताया था। अधिकारियों और संस्थापकों का दावा है कि एआई सम्मेलन में लॉन्च किए गए मॉडल कुछ चुनिंदा मानकों पर अग्रणी वैश्विक एआई प्रणालियों से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मॉडल की तुलना में बहुत कम लागत पर तैयार किए गए इन पहलों का उद्देश्य इंडिया एआई मिशन के उस लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।

भारत ने ‘स्ट्रैटेजी फॉर आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर इन इंडिया’ (सही) और ‘बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म फॉर हेल्थ एआई’ (बोध) की भी घोषणा की। जहां ‘सही’ का उद्देश्य भारत के स्वास्थ्य तंत्र में एआई का सुरक्षित और साक्ष्य-आधारित उपयोग को नैतिक तरीके से सुनिश्चित करना है, वहीं बोध बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले एआई समाधानों के परीक्षण और सत्यापन के लिए एक सुव्यवस्थित तंत्र मुहैया कराता है।

रविवार तक 89 देशों द्वारा हस्ताक्षरित ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में इस बात पर जोर दिया गया कि हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर संसाधनों तक पहुंच स्वतंत्र रूप से  होनी चाहिए ताकि आधारभूत एआई तकनीक  सस्ती और सुलभ हो सके।

मॉडल लॉन्च के अलावा इस सम्मेलन में दो प्रमुख विषय बार-बार उभरे और वे थे- एआई की सुलभता और विश्वसनीयता। ‘दिल्ली घोषणापत्र’ भले ही स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी है लेकिन यह एआई के स्वतंत्र रूप से प्रसार और ‘ग्लोबल एआई कॉमन्स’ की अवधारणा पर जोर देती है। यह ग्लोबल एआई कॉमन्स एक ऐसे डेटाबेस के रूप में है, जहां विभिन्न देश उपयोग के उदाहरणों से प्रेरणा ले सकें। घोषणा   में यह भी स्वीकार किया गया है कि एआई संसाधन सभी को सुलभ कराने जरूरी हैं और इसे कुछ शक्तिशाली देशों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। अमेरिका और चीन के बीच एआई वर्चस्व की दौड़ के चलते यह चिंता लगातार बनी हुई है कि एआई से जुड़ी क्षमताएं कुछ चुनिंदा कंपनियों के हाथों में केंद्रित न हो जाएं। 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने इस मौके पर कहा, ‘एआई का भविष्य कुछ गिने-चुने देशों द्वारा तय नहीं किया जा सकता और न ही इसे कुछ अरबपतियों पर छोड़ा जा सकता है।’ एआई प्रणालियों को बड़े पैमाने पर लागू करने में विश्वसनीयता और सुरक्षा का मुद्दा चर्चा के केंद्र में रहा। डेमिस हसाबिस, योशुआ बेंगियो और विशाल सिक्का जैसे विशेषज्ञों ने एआई प्रणालियों के ‘जैग्ड इंटेलिजेंस’ जैसे पहलू पर भी विचार रखा। उनका कहना था कि ये प्रणालियां जटिल कामों में बेहद सक्षम होती हैं, लेकिन कई बार साधारण कामों में भी बुनियादी गलतियां कर बैठती हैं।

इस सम्मेलन में वैश्विक स्तर पर एआई जगत के दिग्गजों और कई कंपनियों के प्रमुखों ने भाग लिया, जिनमें सैम ऑल्टमैन, सुंदर पिचाई, ब्रैड स्मिथ और आर्थर मेंस्च जैसे नाम शामिल हैं।

 

First Published : February 22, 2026 | 10:27 PM IST