न्यायमूर्ति डी के जैन और न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर की खंडपीठ ने इस मामले का निबटारा करते हुए कहा कि प्रकरण को जिस समय विचार के लिए लिया गया उसकी तुलना में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अब बिजली की स्थिति में एक हजार गुणा सुधार हो चुका है।
न्यायालय ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियों ने बहुत ही अच्छा काम किया है और इसके लिए वे प्रशंसा की पात्र हैं।
न्यायालय ने बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण अखिल भारतीय आयुर्विग्यान संस्थान में एक मरीज की मृत्यु होने की घटना को लेकर 1999 में दायर जनहित याचिका पर विचार करना शुरू किया था। पिछले 13 साल के दौरान यह मामला 57 बार सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ था और इस दौरान न्यायालय ने अनेक निर्देश भी दिये थे।
भाषा अनूप