बोस ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, यह जानते हुए कि अन्य राजनैतिक दलों में से कोई भी उनके अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा, उन्होंने लोकसभा में यह प्रस्ताव रखा जो संख्या के अभाव में पारित नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा कि ममता ने पहले ही अविश्वास प्रस्ताव लाने का अपनी पार्टी का रुख जाहिर कर दिया था। इससे उनकी राजनैतिक अपरिपक्वता का पता चलता है। हमारी पार्टी इस तरह से काम नहीं करती।
बोस ने कहा कि ममता ने इस प्रस्ताव के लिए माकपा:माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी: का समर्थन मांगा था, लेकिन पार्टी राजी नहीं हुई क्योंकि तृणमूल के साथ मिल कर भी संख्या पूरी नहीं हो पाती।
उन्होंने कहा, इसलिए हमने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं करने का फैसला किया और नियम 184 के तहत एफडीआई पर चर्चा की मांग की। अन्य दल भी ऐसा ही सोच रहे थे।
वाम मोर्चा की आज हुई एक बैठक में तीन दिसंबर से 25 जनवरी तक राज्य में खाद्य सुरक्षा पर 50 दिनों का एक हस्ताक्षर अभियान चलाने का फैसला किया गया।