न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह की पीठ ने विभिन्न पक्षों की दलीलों पर सुनवाई के बाद कहा कि पुनर्विचार याचिका पर फैसला बाद में सुनाया जायेगा।
दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी ने दलील दी थी कि अदालत को पुनर्विचार याचिका खारिज कर देनी चाहिए क्योंकि याचिकाकर्ता एनजीओ ने अपनी मुख्य याचिका में बीआरटी कॉरिडोर रद्द करने के लिए मास्टर प्लान के उल्लंघन के आधार का उल्लेख नहीं किया है।
एनजीओ न्याय भूमि की ओर से इसके अध्यक्ष बी बी शरण की पुनर्विचार याचिका में कहा गया है, एमपीडी 2021 एक वैधानिक योजना है और इसमें कानून का प्रभाव है। मास्टर प्लान के अनुसार बीआरटी 45 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर नहीं बनाया जा सकता।
याचिका के अनुसार, दिल्ली, 2012 के मास्टर प्लान के तहत बीआरटी बनाने का विचार उस सड़क मार्ग पर किया जाता है जहां सड़क की कुल चौड़ाई 45 मीटर या उससे उपर हो। हालांकि इस अदालत ने त्रुटिवश 45 मीटर को 100 फुट के बराबर गिन लिया था जबकि 45 मीटर करीब 150 फुट होता है।
उच्च न्यायालय ने इससे पहले जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा था, मौजूदा सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने की कोई गुंजाइश नहीं है और दिल्ली की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। अत: हम इस तथ्य से नहीं बच सकते कि दिल्ली के नागरिकों को एक न एक दिन सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना होगा।