Advertisement
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिजMulti-Factor Funds: कम जोखिम में बेहतर रिटर्न का मौका या सिर्फ नया ट्रेंड? निवेश से पहले जानें फायदे-नुकसानICICI Pru MF ने लॉन्च किया नया फंड, ₹1,000 से स्मॉलकैप कंपनियों में निवेश का मौका‘सेबी ने खातों को गलत समझा’, राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर ने फंड की हेराफेरी के आरोपों को खारिज कियाक्रिकेट से रियल एस्टेट तक: पूर्व क्रिकेटर अजीत अगरकर ने मुंबई में बेचा फ्लैट, जाने कितनी मिली कीमत!Gold ETF से एक साल में पहली बार निकासी, बढ़ी निवेशकों की चिंता; अब आगे क्या करना चाहिए?टेक्निकल एक्सपर्ट की पसंद बने Polycab और Coal India, निवेशक क्यों रखें नजर?बजाज फिनसर्व के बोर्ड से हटेंगे राजीव बजाज, ऑटो कारोबार पर बढ़ाएंगे फोकसचांदी में अभी और गिरावट का खतरा, लेकिन लंबी अवधि में मिल सकता है 150% तक रिटर्नSpaceX ला रही है इतिहास का सबसे बड़ा IPO, भारतीय निवेशक कैसे कर पाएंगे निवेश?
अन्य समाचार स्वदेशी शोध को आगे बढ़ाने के लिये नई सोच पैदा करें: मूर्ति
'

स्वदेशी शोध को आगे बढ़ाने के लिये नई सोच पैदा करें: मूर्ति

PTI

- November,03 2012 6:53 PM IST

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट आफ इनफार्मेशन टेक्नोलाजी के दीक्षांत समारोह में मूर्ति ने कहा कि बहुचर्चित भारतीय साफ्टवेयर क्षेत्र अब हर नया शोध पश्चिमी देशों से आयात कर रहा है। वह भी तब जब देश में हर साल बड़ी संख्या में साफ्टवेयर इंजीनियर निकल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एकमात्र जोर परीक्षा पास करने तथा रटंत विद्या पर है। नई सोच तथा बुनियादी चीजों का उपयोग नहीं होने से साफ्टवेयर उद्योग की यह स्थिति हुई है।

मूर्ति के अनुसार दुर्भाग्य की बात है कि साफ्टवेयर इंजीनियरिंग, गुणवत्ता, उत्पादकता, सुरक्षा आदि के क्षेत्र में भारतीय साफ्टवेयर उद्योग में आज जो भी प्रगति हो रही है, वह पश्चिमी देशों की बदौलत है।

उन्होंने कहा, ....हम जो भी पुस्तक का उपयोग करते हैं, उसे दूसरे देश में रहने वाले लोगों ने लिखा है। हम जो भी गजट का उपयोग करते हैं और जो भी शोध हम आसपास देखते हैं, उसे दूसरे देशों में ईजाद किया गया है। आखिर ऐसा क्यों है?

छात्रों की शिक्षा के रूख में बदलाव का सुझाव देते हुए मूर्ति ने कहा कि शिक्षा का मतलब कालेज में परीक्षा पास करना नहीं होना चाहिए और पेशेवरों को जीवन भर सीखने की प्रक्रिया जारी रखनी चाहिए।

दीक्षांत समारोह में नासकाम के पूर्व प्रमुख किरण कार्निक तथा आईआईटी दिल्ली के निदेशक पंकज जलोटे ने भी भाग लिया।

भाषा

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement