Advertisement
‘सेबी ने खातों को गलत समझा’, राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर ने फंड की हेराफेरी के आरोपों को खारिज कियाक्रिकेट से रियल एस्टेट तक: पूर्व क्रिकेटर अजीत अगरकर ने मुंबई में बेचा फ्लैट, जाने कितनी मिली कीमत!Gold ETF से एक साल में पहली बार निकासी, बढ़ी निवेशकों की चिंता; अब आगे क्या करना चाहिए?टेक्निकल एक्सपर्ट की पसंद बने Polycab और Coal India, निवेशक क्यों रखें नजर?बजाज फिनसर्व के बोर्ड से हटेंगे राजीव बजाज, ऑटो कारोबार पर बढ़ाएंगे फोकसचांदी में अभी और गिरावट का खतरा, लेकिन लंबी अवधि में मिल सकता है 150% तक रिटर्नSpaceX ला रही है इतिहास का सबसे बड़ा IPO, भारतीय निवेशक कैसे कर पाएंगे निवेश?अमेरिका-ईरान तनाव से भारत को झटका, Fitch ने FY27 ग्रोथ अनुमान 6.4% कियाTCS को AI में दिख रहे हैं 5 बड़े मौके, निवेशकों के लिए अहम संकेतPower Stocks: रिकॉर्ड ऑर्डर, रिकॉर्ड कमाई… फिर भी क्यों सावधान रहने को कह रहे हैं एक्सपर्ट?
अन्य समाचार दर्जा बढ़ाने के लिए इस महीने संरा महासभा में मतदान चाहता है फलस्तीन
'

दर्जा बढ़ाने के लिए इस महीने संरा महासभा में मतदान चाहता है फलस्तीन

PTI

- November,01 2012 10:23 PM IST

वाईनेट न्यूज की खबर के अनुसार, ऑब्जर्वर से गैर सदस्यीय देश का दर्जा पाने के लिए पीए इस महीने की 15 या 29 तारीख को मतदान कराने को इच्छुक है ।

यह दोनों ही तारीख फलस्तीन के राष्ट्रीय आंदोलन के लिहाज के बहुत महत्वपूर्ण हैं । 15 नवंबर 1988 को फलस्तीनी नेता यासर अराफात ने अल्जीरिया से फलस्तीन की स्वतंत्रता की घोषणा की थी और 29 नवंबर 1947 को संयुक्त राष्ट्र ने फलस्तीन के बंटवारे की योजना पर मतदान कर उसे स्वीकार किया था ।

प्रति वर्ष 29 नवंबर को फलस्तीन के लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शन दिवस के रूप में मनाया जाता है । इसकी शुरूआत संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1977 में की ।

फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस मुद्दे पर न्यूयॉर्क में सितबंर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में ही मतदान कराने की मांग की थी लेकिन अमेरिका के अनुरोध पर इसे टाल दिया गया । अमेरिका ने कहा था कि इसके लिए फलस्तीन को अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव समाप्त होने तक इंतजार करना होगा ।

इस मतदान में फलस्तीन के पक्ष में फैसला होने पर उसे इस्राइल के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है । ऐसा होने पर फलस्तीन को इस्राइल द्वारा पीए के लिए वसूली गई कर की राशि भी नहीं मिलेगी और उसे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा । यह कर की राशि फलस्तीन की बजट का लगभग एक तिहाई हिस्सा है ।

फलस्तीनी प्राधिकरण को बजट संबंधी सहायता की पेशकश करने वाला और देने वाला पहला देश भारत है ।

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement