लिट्टे समर्थक लॉबी के अभियान से निबटने में नाकाम रहने पर आलोचना का सामना कर रहे विदेशों में नियुक्त श्रीलंकाई शीर्ष राजनयिकौं को देश में आयोजित एक कार्यशाला में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इस कार्यशाला का उद्देश्य देश की विदेश नीति को बेहतर तरीके से संचालित करने में उनकी मदद करना है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि दो दिवसीय कार्यशाला इसी हफ्ते रिसार्ट दियातालावा में आयोजित होगा।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कार्यशाला में वरिष्ठ मंत्रियों के अलावा विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी भी शामिल होंगे। इसमें विभिन्न देशों में श्रीलंका के राजदूत, उच्चायुक्त और वाणिज्यदूत भी भाग लेंगे।
लिट्टे के खिलाफ संघर्ष तीन साल पहले समाप्त हुआ था। उसके बाद से श्रीलंका मानवाधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आलोचना का सामना करता रहा है। देश के खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब देने में विफल रहने पर राजनयिकों की खासी आलोचना की जाती रही है।
आलोचक पश्चिमी देशों में नियुक्त राजनयिकों को विशेष रूप से निशाना बनाते रहे हैं।