ईरान के उपमंत्री
मंत्री ने इसके साथ ही भारत से ईरान-पाकिस्तान-भारत :आईपीआई: गैस पाइपलाइन परियोजना से जुड़ने पर अपना मन बनाने को कहा।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, े भारत सरकार ने तेल खरीद के लिए एक अरब रपये का भुगतान किया है लेकिन चूंकि भारतीय बैंकों ने धन के भुगतान की सुविधा देने से मना कर दिया है और ईरान की कोई बैंक शाखा यहां नहीं है, हम हालात का समाधान निकालने के लिए काम कर रहे हैं। े
भारतीय रिजर्व बैंक ने दिसंबर 2010 में ईरान को भुगतान की प्रणाली एशियन क्लीयरिंग यूनियन को बंद कर दिया था। इसके बाद भारत, ईरान से तेल आयात के 55 प्रतिशत का भुगतान तुर्की के बैंक के जरिए कर रहा है। शेष 45 प्रतिशत राशि का भुगतान रपये में यूको बैंक के जरिए किया जा रहा है।
अपने विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान पश्चिमी देशों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।
मेहमान मंत्री ने कहा कि आईपीआई गैस परियोजना चल रही है और क्षेत्र के सभी देशों के लिए खुली है।
उन्होंने कहा, े यह भारत पर है कि वह इस बारे में मन बनाए और परियोजना में शामिल हो। हमारा मानना है कि यह भारत के हित में होगा। हम और पाकिस्तान इस पर काम रहे हैं और हम इसे लेकर गंभीर हैं। हमारे हिस्से का काम पूरा हो चुका है और अब पाकिस्तान की मदद की जा रही है। े
भारत ने इस परियोजना की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी क्योंकि यह पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से होकर गुजरेगी। इसके अलावा पाकिस्तान के साथ परिवहन तथा पारेषण शुल्क को लेकर गतिरोध है।
भाषा