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बीमा में ज्यादा विदेशी निवेश सीमा
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली March 12, 2015

राज्यसभा ने आज बीमा संशोधन विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसी के साथ बीमा में विदेशी निवेश की सीमा 49 फीसदी किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। लोकसभा इसे पहले ही पारित चुकी है। इस बीच, बंबई स्टॉक एक्सचेंज में आज निजी क्षेत्र की बीमा इकाइयों के प्रवर्तकों की कंपनियों के शेयरों में खासी उछाल दर्ज की गई। 
संसद में विधायी कार्य सुचारू चलाने के लिए भाजपा ने विपक्षी दलों से बातचीत करते हुए कांग्रेस को मनाने में कामयाबी हासिल की। आज राज्यसभा में वामपंथी दलों ने विधेयक पर एक संशोधन प्रस्ताव में मतदान की मांग की, जो गिर गया। तृणमूल कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया।
इससे पहले सरकार ने कांग्रेस के साथ बातचीत का दौर जारी रखते हुए उससे व्यावहारिक रुख अपनाने की अपील की और कहा कि यह 2008 के विधेयक की तरह ही है, जो संप्रग सरकार के कार्यकाल में लाया गया था और यह 'संप्रग का अपना ही विधेयक' है।
2015 के विधेयक को सदन में रखे जाते समय कुछ नाटकीय पल भी देखने को मिले, जब वाम दलों और समाजवादी पार्टी ने पहले 2008 के विधेयक को वापस लिए जाने की मांग की, जो सदन में लंबित है और इसे एक प्रवर समिति के पास भेजा गया था।
पिछले सात साल से बीमा संशोधन विधेयक तमाम उतार-चढ़ाव का सामना करता आ रहा था। मनमोहन सिंह सरकार के समय इसे स्थायी समिति के पास भेजा गया था, जहां 88 संशोधनों की सिफारिश की गई लेकिन भाजपा के कड़े प्रतिरोध के बाद विधेयक आगे नहीं बढ़ सका। अपनी सरकार बनने के बाद भाजपा के रुख में भी बदलाव आया। इसके बाद नई सरकार ने इस विधेयक को ऊपरी सदन की एक प्रवर समिति के पास भेजा, जिसके अध्यक्ष चंदन मित्रा थे। वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा और चंदन मित्रा दोनों ने कहा कि विधेयक से ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा कारोबार में इजाफा होगा।
विधेयक में बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने का प्रस्ताव है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश से संबंधित जटिलताएं दूर होंगी और इससे बीमा क्षेत्र में एफडीआई के जरिये तत्काल 21,805 करोड़ रुपये की नई पूंजी आने का अनुमान है। हालांकि इस क्षेत्र को 44,805 करोड़ रुपये की पूंजी की जरूरत है।
मित्रा ने पुनर्बीमा के लिए बाजार खोलने की भी वकालत की और कहा कि संशोधन के बाद भारत की बड़ी आबादी को स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाने में मदद मिलेगी। सिन्हा ने कहा कि आज एलआईसी जैसी एक नहीं दस कंपनियों की जरूरत है। ऐसी कंपनियां विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में समर्थ होनी चाहिए। उन्होंने रेलवे द्वारा एलआईसी से किए गए सहमति करार का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि हमारी जीवन बीमा कंपनियां मजबूत होंगी तो आधारभूत क्षेत्र के लिए हमें अधिक निवेश मिल सकेगा।
बीमा विधेयक का समर्थन करते हुए कांग्रेस के प्रोफेसर राजीव गौड़ा ने दोहराया कि यह विधेयक संप्रग का विचार था और हम राजग द्वारा उसी को आगे बढ़ाने का स्वागत करते हैं।  उन्होंने कहा, 'हम यू टर्न नहीं लेते। यह दुखद है कि यह विधेयक 2008 में भी पारित हो सकता था, बशर्ते राजग ने इसे तब समर्थन दे दिया होता।' उन्होंने कहा कि इस विधेयक का लाभ गरीब से गरीब को मिले इसे सुनिश्चित करना चाहिए और बीमा उत्पादों का विविधीकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश  की सीमा को 49 प्रतिशत पर सीमित कर भारतीय स्वामित्व को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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